आगरा जामा मस्जिद की सीढ़ियों की फिलहाल नहीं होगी खुदाई, श्रीकृष्ण विग्रह से जुड़ा प्रार्थना पत्र पर फैसला नहीं

आगरा/मथुरा। श्रीकृष्ण विग्रह से जुड़े एक अहम मोड़ पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने आगरा स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद की सीढ़ियों की खुदाई कराने की मांग पर फिलहाल कोई निर्णय न लेते हुए स्पष्ट किया कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से प्लेसेज ऒफ वर्शिप एक्ट 1991 पर कोई निर्णय नहीं आ जाता, ऐसी किसी खुदाई की अनुमति सिर्फ दावों के आधार पर नहीं दी जा सकती।

Jul 19, 2025 - 18:21
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आगरा जामा मस्जिद की सीढ़ियों की फिलहाल नहीं होगी खुदाई, श्रीकृष्ण विग्रह से जुड़ा प्रार्थना पत्र पर फैसला नहीं

याचिकाकर्ता मथुरा के वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर दावा किया था कि मुगल शासक औरंगजेब ने 1670 में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर को ध्वस्त कर वहां की मूल विग्रह (स्वर्णजड़ित श्रीकृष्ण प्रतिमा) को आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे चिनवा दिया था। इस विग्रह को बाहर निकालने के लिए याचिकाकर्ता ने न्यायालय से कमीशन गठित कर खुदाई कराने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने इस इस मांग को यह कहते हुए टाल दिया कि सर्वोच्च न्यायालय ने प्लेसेज ऒफ वर्शिप एक्ट 1991 पर फैसला न आने तक एतिहासिक स्थलों को लेकर किसी भी प्रकार के आदेश पर रोक लगाई हुई है। कोर्ट ने कहा कि केवल ऐतिहासिक या सांस्कृतिक दावों के आधार पर ऐसे हस्तक्षेप न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में नहीं आते, जब तक स्पष्ट और ठोस प्रमाण प्रस्तुत न किए जाएं।

ज्ञातव्य है कि मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़ी कई याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित हैं। श्रीकृष्ण के विग्रह को लेकर अधिवक्ता महेंन्द्र प्रताप सिंह द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया था कि मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र वज्रनाभ ने उनका मंदिर बनवाया था, जिसका बाद में सुदृढ़ीकरण राजा विक्रमादित्य ने कराया था। इसके बाद समय-समय पर विदेशी आक्रांता इस मंदिर को तोड़ते रहे और तब के हिंदू राजा और आम जनता इसका फिर से निर्माण कराते रहे। वर्ष 1760 में औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर बने मंदिर को तुड़वाकर वहां मस्जिद का निर्माण कराया था और गर्भगृह में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह को आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में दबवा दिया था।

SP_Singh AURGURU Editor