जनरल नरवणे की किताब लीक होने पर एफआईआर, मंजूरी मिलने से पहले कॉपी आई मार्केट में
दिल्ली पुलिस ने जनरल एम एम नरवणे की अप्रकाशित किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के सोशल मीडिया सर्कुलेशन पर एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कर रही है। लोकसभा में भी इस किताब को लेकर विवाद जारी है। राहुल गांधी इस मुद्दे पर बहस की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे गैरजरूरी बता रही है।
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम एम नरवणे की एक अप्रकाशित किताब के सोशल मीडिया पर सर्कुलेशन को लेकर एफआईआर दर्ज की है। एक आधिकारिक बयान में सोमवार को यह जानकारी दी गई। बयान में कहा गया है, “दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन न्यूज़ फोरम पर सर्कुलेट हो रही जानकारी का संज्ञान लिया है, जिसमें दावा किया गया है कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ नाम की एक किताब की प्री-प्रिंट कॉपी सक्षम अधिकारियों से ज़रूरी मंज़ूरी के बिना सर्कुलेट की जा रही है।” यह भी बताया गया कि इस किताब के पब्लिकेशन के लिए ज़रूरी मंज़ूरी अभी संबंधित अधिकारियों से नहीं मिली है।
जांच करने पर पता चला कि उसी टाइटल वाली एक टाइप-सेट किताब की पीडीएफ कॉपी, जिसे जाहिर तौर पर मेसर्स पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार किया है, कुछ वेबसाइटों पर उपलब्ध है और कुछ ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म ने तैयार किताब का कवर भी दिखाया है, जैसे कि वह खरीदने के लिए उपलब्ध हों। अभी तक मंज़ूरी न मिली पब्लिकेशन के इस कथित लीक/उल्लंघन की पूरी जांच करने के लिए, स्पेशल सेल में एक मामला दर्ज किया गया है और जांच की जा रही है।
इस किताब को लेकर लोकसभा में 2 फरवरी से गतिरोध की स्थिति बनी हुई है और कांग्रेस समेत विपक्ष के सदस्य राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देते हुए चीन से टकराव का मुद्दा नहीं उठाने देने, विपक्ष के आठ सदस्यों को आसन की अवमानना के मामले में निलंबित करने समेत विभिन्न मुद्दों पर हंगामा कर रहे हैं।
एफआईआर के बाद किताब के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने साफ कहा कि यह अभी प्रकाशित नहीं हुई, न कोई प्रिंट कॉपी बनी है, न डिजिटल रूप में जारी की गई। ऑनलाइन फैल रही कॉपियां कॉपीराइट की चोरी है। कंपनी इनके खिलाफ कानूनी कदम उठाएगी। किताब 2024 से मंजूरी का इंतजार कर रही थी।
पुलिस ने सोशल मीडिया और न्यूज वेबसाइटों पर वायरल हो रही जानकारी पर नजर रखी। जांच में पता चला कि टाइपसेट पीडीएफ कई वेबसाइटों पर उपलब्ध ह। स्पेशल सेल डिजिटल स्रोतों, लीक करने वालों और संभावित संगठित तरीके से इसे फैलाने वालों तक पहुंचनी की कोशिश कर रही है।
यह केस ऐसे समय दर्ज की गई है, जब 4 फरवरी को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को संसद परिसर में किताब की एक कॉपी दिखाते हुए देखा गया था। राहुल ने कहा था- अगर पीएम मोदी संसद आए तो उन्हें यह किताब दूंगा। राहुल ने कहा था कि वह इस किताब के अंश लोकसभा में पढ़ना चाहते हैं लेकिन स्पीकर ओम बिरला ने इसकी इजाजत नहीं दी।
लोकसभा में 2-3 फरवरी को राहुल गांधी ने एक मैगजीन में छपे आर्टिकल को पढ़ने की कोशिश की थी। उन्होंने दावा किया था कि इसमें नरवणे की बुक के अंश हैं। स्पीकर ओम बिरला ने इसकी इजाजत नहीं दी। इसके बाद लोकसभा में हंगामा हो गया था, जिससे कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। वहीं हंगामा करने वाले आठ सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था।
4 फरवरी को राहुल ने किताब का वह पेज खोलकर दिखाया, जिसमें लिखा है कि प्रधानमंत्री ने आर्मी चीफ से कहा था- जो उचित समझो वह करो!। राहुल ने कहा कि सरकार और रक्षा मंत्री कह रहे है कि किताब का अस्तित्व नहीं है। नरवणे की इस अनपब्लिश बुक में चीन के साथ भारतीय सेना की 2020 की झड़पों के साथ-साथ अग्निवीर योजना को रिव्यू किया गया है।
नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे हैं। उन्होंने पिछले साल कसौली में आयोजित खुशवंत सिंह लिस्टरेचर फेस्टिवल में बताया था कि उन्होंने अपनी किताब पेंग्विन पब्लिशर ग्रुप को छपने के लिए दे दी है। अब यह पब्लिशर्स और सरकार के बीच का मामला है। किताब रक्षा मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजी गई है। एक साल से ज्यादा हो चुका है लेकिन इसे पब्लिश करने की मंजूरी नहीं मिली है।
कांग्रेस ने एक मैगजीन में पब्लिश आर्टिकल के पेज सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किए। इसमें पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश बुक फोर स्टार्स आफ डेस्टिनी के अंश हैं। इसमें 31 अगस्त 2020 को लद्दाख सीमा पर भारत-चीन के बीच बने हालात का जिक्र है। बताया जब चीनी टैंक पूर्वी लद्दाख में बढ़ रहे थे तब क्या हुआ?