एसी- टीवी, बाइक, सिलाई मशीन समेत खाने-पीने के सामान हुए सस्ते, नई दरें 22 सितंबर से होंगी लागू

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से जीएसटी सुधारों की घोषणा की थी। इसी सिलसिले में जीएसटी काउंसिल की दो दिन की बैठक आज शुरू हो गई। मीटिंग में पहले दिन कई अहम फैसले लिए गए। रोजाना की सभी जरूरी चीजों पर 5 फीसदी जीएसटी लगा है। फ्रिज, टीवी और एयर कंडीशनर पर भी जीएसटी कम हो गया है। नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी।

Sep 3, 2025 - 23:32
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एसी- टीवी, बाइक, सिलाई मशीन समेत खाने-पीने के सामान हुए सस्ते, नई दरें 22 सितंबर से होंगी लागू


 
पान मसाला, गुटखा, शराब आदि जैसी चीजों पर 40 फीसदी जीएसटी लगाया गया है। इंडीविजुअल इंश्योरेंस पॉलिसी, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को जीएसटी फ्री कर दिया गया है। यानी अब इंश्योरेंस खरीदना सस्ता हो सकता है। सीमेंट पर भी जीएसटी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है। इससे घर बनाना अब सस्ता होगा। कैंसर समेत 33 तरह की लाइफ सेविंग दवाइयां भी सस्ती हो गई हैं। कई दवाइयों पर जीएसटी जीरो कर दिया गया है। छोटी कारें और मोटरसाइकिल (350CC) भी सस्ती हो गई हैं। इन पर अब 28 की जगह 18 फीसदी जीएसटी लगेगा। इसी प्रकार टीवी भी सस्ते हो गए हैं। इस पर भी जीएसटी घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है।

जीएसटी मीटिंग में पहले दिन फैसला लिया गया कि 12% और 28% के स्लैब खत्म होंगे। 22 सितंबर से ही लागू जो जाएंगी नई दरें। पिज्जा और ब्रेड पर कोई जीएसटी नहीं। दूध और पनीर पर भी कोई जीएसटी नहीं होगा। जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि GST में कुछ बदलाव होने वाले हैं। इन बदलावों से जम्मू और कश्मीर की कमाई कम हो सकती है। उमर अब्दुल्ला के अनुसार, राज्य की कमाई 10-12% तक घट सकती है। इससे राज्य के आर्थिक हालात और भी खराब हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से ही राज्य की कमाई पहले से ही बहुत कम हो गई है।

जीएसटी काउंसिल ने जूते और कपड़ों पर लगने वाले टैक्स को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सूत्रों से पता चला है कि अब 2,500 रुपये तक के जूते और कपड़ों पर जीएसटी की दर कम करके 5% कर दी गई है। पहले 1,000 रुपये तक के जूते और कपड़ों पर 5% टैक्स लगता था। लेकिन अगर कीमत इससे ज्यादा होती थी, तो 12% जीएसटी लगता था। कुछ विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों ने केंद्र सरकार से एक सवाल पूछा है। कर्नाटक, पंजाब और पश्चिम बंगाल ने केंद्र से जीएसटी में बदलाव से होने वाले नुकसान का अनुमान लगाने को कहा है। इन राज्यों ने राजस्व सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार से यह भी पूछा है कि अगर जीएसटी की दरों में बदलाव किया जाता है, तो उन्हें कितना नुकसान हो सकता है।

एमएसएमई रजिस्ट्रेशन अब जल्दी होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एमएसएमई के लिए रजिस्ट्रेशन अब सिर्फ तीन दिनों में हो जाएगा। पहले इसमें कई हफ्ते लग जाते थे। इससे छोटे कारोबारियों के लिए अब रजिस्ट्रेशन कराना आसान हो जाएगा। जीएसटी काउंसिल ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब टेक्सटाइल, फार्मा, केमिकल और फर्टिलाइजर जैसे उद्योगों को रिफंड जल्दी मिलेगा। इन उद्योगों का इंवर्टे़ड  ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत फंसा हुआ रिफंड अब सिर्फ सात दिनों में क्लियर हो जाएगा।

इस बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि वह प्रधानमंत्री के जीएसटी व्यवस्था में सुधार के प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं। असम 5 परसेंट और 18 परसेंट जीएसटी के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि हम भारत सरकार के फैसले का समर्थन करेंगे। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री एमपी चौधरी के अलावा दिल्ली, हरियाणा, गोवा, जम्मू कश्मीर और ओडिशा के मुख्यमंत्री इसमें हिस्सा ले रहे हैं। साथ ही अरुणाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री, मणिपुर के राज्यपाल और राज्यों के वित्त मंत्री भी इसमें शामिल हैं।

जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक नई दिल्ली में शुरू हो चुकी है। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कर रही हैं। इसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हैं। इसमें जीएसटी के स्लैब कम करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। 12% और 28% वाले स्लैब को खत्म किया जा सकता है। अभी इनमें शामिल आइटम्स को कम स्लैब में लाया जा सकता है। 40% वाला एक स्पेशल स्लैब बनाया जा सकता है जिसमें सिन और लग्जरी आइटम्स को शामिल किया जा सकता है।

बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में यह नई पीढ़ी का बड़ा जीएसटी रिफॉर्म है। इस मीटिंग पर पूरे देश के व्यापारियों की नजर लगी हुई है। उन्हें उम्मीद है कि इस बैठक के बाद जीएसटी सुधारों की घोषणा होगी, स्लैब की संख्या में कमी आएगी और कई चीजों पर टैक्स में कटौती होगी। इससे न सिर्फ व्यापारियों को फायदा होगा बल्कि उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा। छोटी कारों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया जा सकता है। इससे मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों को फायदा होगा। लेकिन इलेक्ट्रिक कारों पर इसे 5 फीसदी से 18 फीसदी किया जा सकता है। टेस्ला और बीवाईडी की लग्जरी गाड़ियों पर और ज्यादा जीएसटी लग सकता है।

टूथपेस्ट, शैंपू, टेलकम पाउडर और साबुन पर जीएसटी की दर 18% से घटाकर 5 फीसदी की जा सकती है। साथ ही बटर, चीज और घी पर भी जीएसटी में कमी की जा सकती है। जीएसटी काउंसिल की मीटिंग से पहले मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी में अगली पीढ़ी के सुधारों से अर्थव्यवस्था बिल्कुल खुली और पारदर्शी हो जाएगी। इससे छोटी कंपनियों को बढ़ने में मदद मिलेगी। सरकार जीएसटी के स्लैब को कम करने की योजना बना रही है। साथ ही रजिस्ट्रेशन और फाइलिंग सिस्टम को भी आसान बनाया जा सकता है।