समाज में समरसता हेतु हिंदुओं का एक मंदिर, एक कुआं और एक शमशान हो

अलीगढ़। समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन के लिए संघ प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत ने शाखा टोली में भी पंच परिवर्तन का मूलमंत्र दिया। उन्होंने स्वयंसेवकों के सवाल के जवाब दिए।

Apr 19, 2025 - 23:28
Apr 20, 2025 - 23:23
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समाज में समरसता हेतु हिंदुओं का एक मंदिर, एक कुआं और एक शमशान हो

" सर संघचालक भागवत ने शाखा पर पंच परिवर्तन का दिया मूलमंत्र " 

कहा कि समाज में तेजी से परिवर्तन लाना है, इसलिए सभी स्वयंसेवकों को पंच परिवर्तन पर विशेष ध्यान देना है। इसमें समाज की बड़ी भूमिका होगी। घर घर जाकर समाज को जागृत करना होगा। 

डॉ. भागवत ने कहा कि भारत ही दुनिया में एकमात्र ऐसा देश है जो विश्व में शांति और सुख समृद्धि लाने में बड़ी भूमिका निर्वहन करेगा। इसलिए विश्व की निगाहें भारत की ओर हैं। स्वयंसेवक अपनी भूमिका के लिए तैयार रहें। समाज समरसता हेतु एक मंदिर, एक कुआं, एक शमशान हो। 

अपने पांच दिवसीय प्रवास के तीसरे दिन डाक्टर मोहन भागवत शनिवार को दो शाखाओं पर गए। सुबह एचबी इंटर कालेज के परिसर में लगने वाली सनातन और शाम को पंचनगरी स्थित भगत सिंह शाखा पर गए। इन दोनों शाखाओं में भागवत ने शाखा टोली को पंच परिवर्तन और शताब्दी वर्ष पर जोर देने को कहा। 

भागवत ने कहा कि समाजिक परिवर्तन में स्वयंसेवकों की बड़ी भूमिका है। स्वयंसेवक राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत होते हैं, इसलिए आप अपने आपको पहचाने। समाज में समरसता का भाव लाएं। संघ के स्वयंसेवक समाज के प्रत्येक वर्ग के घर जाएं। उनसे बातचीत करें। उन्हें आदर सत्कार के साथ अपने घर भी बुलाएं। तीज, त्यौहार आदि कार्यक्रम भी मिलकर साथ करें। जिससे समाज में सामाजिक समरसता का भाव पैदा हो। 

उन्होंने कहा कि कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से हमें परिवार और संस्कार को बनाए रखना है। भारत की सबसे बड़ी पूंजी संस्कार है। परिवार में एक साथ पूजन, हवन करें। साथ साथ भोजन करें, जिससे परिवार की कड़ी मजबूत बनी रहे।