बकरी पालन से समृद्धि की ओर : केंद्रीय मंत्री प्रो. बघेल ने दिया ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मंत्र
मथुरा। आईसीएआर द्वारा केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मखदूम, मथुरा में ‘बकरी पालन से समृद्धि की ओर’ विषय पर हुई कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय पशुपालन, मत्स्य, डेयरी एवं पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि बकरी पालन छोटे व सीमांत किसानों की आजीविका संवर्धन, पोषण सुरक्षा और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त साधन है।
प्रो. बघेल ने किसानों से पारंपरिक तरीकों के बजाय वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। राज्य मंत्री ने कहा कि लैब से लैंड तक ज्ञान पहुंचाने का संस्थान का प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने जोर दिया कि एफएमडी (खुरपका–मुंहपका) मुक्त भारत बनने से ही पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में वास्तविक आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है।
इस कार्यशाला में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लगभग 250 बकरी पालकों ने सहभागिता की। किसानों को बकरी पालन से जुड़े नवीन वैज्ञानिक उपायों, स्वास्थ्य प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव पर विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में संस्थान ने युवान एग्रो (आगरा) और शून्य एग्रो टेक के साथ तकनीकी सहयोग समझौता भी हुआ। इस सहयोग से किसानों को आधुनिक बकरी पालन तकनीक और विपणन के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
कार्यशाला में डॉ. मनीष कुमार चेटली – निदेशक, सीआईआरजी, सोनपाल – निदेशक, दीनदयाल शोध संस्थान, मथुरा, डॉ. ए.के. दीक्षित, डॉ. मुकेश भकत, डॉ. गोपाल दास, डॉ. अरविंद कुमार, श्री डी.के. सिंह (युवान एग्रो) एवं श्री विजय सिंह (शून्य एग्रो टेक) भी मौजूद रहे।
केंद्रीय मंत्री के साथ ही विभिन्न वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किसानों को बकरी पालन के माध्यम से आजीविका उन्नयन और ग्रामीण समृद्धि के नये आयाम सुझाए।