पीड़ा से आज़ादी तक: नर हाथी सूरज और राजेश ने मनाई स्वतंत्रता की वर्षगांठ
मथुरा। हाथी कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत वाइल्डलाइफ एसओएस ने अपने दो नर हाथियों सूरज और राजेश की आज़ादी की वर्षगांठ भावनात्मक और प्रेरक रूप से मनाई। वर्षों की कैद, शोषण और पीड़ा के बाद, आज ये दोनों हाथी सम्मान, देखभाल और स्वतंत्रता से भरा जीवन जी रहे हैं। वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा बचाए जाने के बाद सूरज ने 10 वर्ष और राजेश ने 15 वर्ष की स्वतंत्रता पूरी कर ली है।
मथुरा केंद्र में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन
लंबे समय तक अमानवीय परिस्थितियों में रहने के बाद बचाए गए सूरज और राजेश आज मथुरा स्थित हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र में रह रहे हैं। यहां उन्हें निरंतर पशु चिकित्सा देखभाल, संतुलित आहार, खुले वातावरण और विशेषज्ञ निगरानी मिल रही है, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक पुनर्वास संभव हो पाया है।
मंदिर की कैद से मुक्ति: सूरज की कहानी
55 वर्षीय सूरज को वर्ष 2015 में महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक मंदिर से बचाया गया था। उसने अपना अधिकांश जीवन अंधेरे बाड़े में जंजीरों से बंधकर बिताया। बचाव के समय उसके पैर सड़ चुके थे, शरीर पर कई घाव और संक्रमण थे, कुपोषण की स्थिति थी और बायां कान स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका था। जिला प्रशासन के सहयोग से चलाए गए जोखिम भरे बचाव अभियान के बाद सूरज को मथुरा केंद्र लाया गया।
पिछले दस वर्षों में विशेष चिकित्सा, पोषणयुक्त आहार और नियमित गतिविधियों ने सूरज को नई ज़िंदगी दी है। आज वह अपने शांत स्वभाव, गन्ने व फलों के प्रति लगाव और पानी के पूल में बिताए लंबे समय के लिए जाना जाता है।
सर्कस के शोषण से आज़ादी: राजेश का सफर

राजेश को उत्तर प्रदेश के एक सर्कस से मुक्त कराया गया था, जहां उसे मनोरंजन के लिए अप्राकृतिक करतब करने पर मजबूर किया जाता था। वर्षों के दुर्व्यवहार ने उसे मानसिक रूप से अत्यंत भयभीत बना दिया था। केंद्र में आने के समय उसमें रूढ़िवादी व्यवहार और मनुष्यों से डर स्पष्ट दिखता था।
पंद्रह वर्षों की दीर्घकालिक चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित पुनर्वास प्रक्रियाओं के बाद राजेश आज केंद्र के सबसे अभिव्यंजक निवासियों में गिना जाता है। उसकी शक्तिशाली आवाज़, स्नान के प्रति प्रेम और अनोखा व्यक्तित्व उसकी नई पहचान बन चुके हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस संस्था के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण और सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि ये बचाव अभियान दर्शाते हैं कि हाथी कल्याण के लिए दीर्घकालिक और संस्थागत समाधानों की कितनी आवश्यकता है। सूरज और राजेश अब अपने अतीत से नहीं, बल्कि उस भविष्य से पहचाने जाते हैं जिसे वे हर दिन नए सिरे से जी रहे हैं। वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी. ने कहा कि दशकों के दुर्व्यवहार से उबरना समय और विश्वास मांगता है।
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