आगरा में हरित गलियारा: यमुना और ताजनगरी के रिश्ते को नया आयाम देगा

आगरा नगर निगम यमुना किनारे एक हरित गलियारा विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। यह संभव हुआ तो यह केवल सौंदर्यीकरण नहीं बल्कि शहर की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। पर्यावरणविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह न केवल पर्यटन को नया आयाम देगा, बल्कि यमुना को संरक्षित करने में सामाजिक भागीदारी भी बढ़ाएगा।

Jun 26, 2025 - 19:45
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आगरा में हरित गलियारा: यमुना और ताजनगरी के रिश्ते को नया आयाम देगा

-बृज खंडेलवाल-

कल्पना कीजिए, ताजमहल की छाया में बहती यमुना के किनारे एक ऐसा गलियारा, जहां हरियाली की चादर बिछी हो, रास्तों पर रंगीन टाइल्स यमुना की गाथा सुना रही हों, पक्षियों का कलरव गूंज रहा हो और हल्की हवा फूलों की भीनी खुशबू से सराबोर हो। पेड़ों की छांव में सजे बैठने के स्थान हों, कहीं ध्यान में मग्न योगी दिखें, तो कहीं बच्चे रंग-बिरंगे मंडपों के पास लोकनाट्य का आनंद ले रहे हों। यह दृश्य किसी स्वप्न लोक से कम नहीं लगेगा।

कुछ ऐसा सपना बसपा सुप्रीमो बहन मायावती ने देखा होगा जब विवादित ताज कॉरिडोर पर 2003 में कार्य शुरू हुआ। मगर पर्यावरण की चिंता से ज्यादा राजनैतिक चालों ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को गर्भ में ही ध्वस्त कर दिया। इसके बाद ईवा कोच के प्रस्तावित रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, अमेरिका के सहयोग से 300 acre पर  ताज नेशनल पार्क योजना, एक्टर संजय खान का प्रोजेक्ट, सब फेल होते रहे।

मगर अब लघु स्तर पर यह सपना  साकार होने को बेताब है। आगरा नगर निगम द्वारा प्रस्तावित यमुना किनारे हरित गलियारा परियोजना शहर को नया स्वरूप देने की ओर एक साहसिक कदम है, मानते हैं पर्यावरणविद डॉ देवाशीष भट्टाचार्य।

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्य ये मांग वर्षों से उठा रहे हैं।  "लाल घाट से वेदांत मंदिर और यमुना आरती स्थल से हाथी घाट तक प्रस्तावित इस हरित पथ का उद्देश्य न केवल यमुना के सौंदर्य को पुनर्जीवित करना है, बल्कि आगरा की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहचान को भी नया जीवन देना है। लंबे समय से उपेक्षा, प्रदूषण और अतिक्रमण से जूझती यमुना अब एक नए अध्याय की प्रतीक्षा कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में नगर निगम ने यमुना आरती, घाट सौंदर्यीकरण और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से नदी को फिर से शहरवासियों के जीवन में केंद्रस्थ करने का प्रयास किया है। अब यह नया गलियारा इन प्रयासों को स्थायित्व और गति देने की दिशा में एक निर्णायक पहल है।"

नगर निगम सूत्र कहते हैं कि इस गलियारे की कल्पना एक ऐसे स्थान के रूप में की जा रही है जहां लोग सैर कर सकें, ध्यान कर सकें, बच्चों के साथ समय बिता सकें और साथ ही नदी के साथ आत्मिक जुड़ाव महसूस कर सकें।

बायो डायवर्सिटी एक्सपर्ट डॉ मुकुल पांड्या के मुताबिक, "हरियाली से घिरे इस पथ के दोनों ओर वृक्ष न केवल छांव देंगे बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी कायम करेंगे। घाटों पर आरती, लोककला प्रदर्शनी, पुस्तक वाचन और सामुदायिक संवाद की गतिविधियां इसे सांस्कृतिक रूप से जीवंत बनाएंगी। ताज कॉरिडोर के पास इस तरह की योजना न केवल पर्यटन को नया आयाम देगी, बल्कि आगरा को वैश्विक स्तर पर एक पर्यावरण-संवेदनशील और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध शहर के रूप में स्थापित करने में सहायक होगी।"

यह पथ आगरा आने वाले पर्यटकों को यमुना के सौंदर्य से परिचित कराएगा, जो अब तक सिर्फ ताजमहल के संगमरमरी सौंदर्य तक सीमित रहते थे। यमुना आरती महंत पंडित जुगल किशोर कहते हैं,   "यमुना के बहाव के साथ-साथ सैर करते हुए जब पर्यटक घाटों की ओर झुकते दीपों की लौ देखें या सुनें कि कैसे यह नदी सदियों से संस्कृति की वाहक रही है, तो उनका अनुभव कहीं अधिक गहरा और आत्मीय होगा। स्थानीय लोगों के लिए यह पथ न केवल एक नया सार्वजनिक स्थान होगा, बल्कि शहरी जीवन की भीड़-भाड़ से हटकर शांति, सामूहिकता और प्रकृति से जुड़ने का माध्यम भी बनेगा।"

रिवर एक्टिविस्ट चतुर्भुज तिवारी मानते  हैं कि इस गलियारे का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इससे यमुना के संरक्षण को सामाजिक समर्थन मिलेगा। जब लोग नदी के किनारे समय बिताएंगे, तो वे इसकी स्वच्छता और सुरक्षा के प्रति भी अधिक जागरूक होंगे। यह परियोजना केवल संरचनात्मक विकास नहीं है, यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन की शुरुआत है।

हालांकि, इस योजना की सफलता केवल उसकी परिकल्पना पर नहीं, बल्कि उसके निष्पादन की गति, पारदर्शिता और गुणवत्ता पर निर्भर करेगी, कहती हैं यमुना भक्त पद्मिनी अय्यर। नगर निगम को चाहिए कि कार्य में विलंब न हो और इस परियोजना को एक मिशन की तरह समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए।

साथ ही इसके रखरखाव के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जाए ताकि यह गलियारा आरंभिक चमक के बाद उपेक्षा का शिकार न हो जाए। स्थानीय निवासियों, युवाओं, स्कूलों, संस्थाओं और संत समाज को इसमें भागीदार बनाना होगा, तभी यह गलियारा केवल नगर निगम की योजना नहीं, बल्कि जन-भागीदारी का प्रतीक बनेगा।

यमुना किनारे प्रस्तावित यह हरित गलियारा आगरा की आत्मा से यमुना के रिश्ते को फिर से गहराई से जोड़ने की पहल है। यह परियोजना यदि अपने संकल्प और रूप में पूर्ण हुई, तो न केवल यमुना पुनर्जीवित होगी, बल्कि आगरा की छवि भी बदलेगी—एक ऐसा शहर जहां इतिहास, प्रकृति और आधुनिकता मिलकर एक नई चेतना रचते हैं।

SP_Singh AURGURU Editor