इजरायल के हाइफा शहर को भारतीय सैनिकों ने तुर्कों से कराया था आजाद

भारत का एक अहसान इजरायल शायद ही कभी चुका पाए। भारतीयों ने जब ओटोमन साम्राज्य के चंगुल से हाइफा शहर को आजाद कराया था।

Sep 30, 2025 - 15:08
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इजरायल के हाइफा शहर को भारतीय सैनिकों ने तुर्कों से कराया था आजाद

 

तेल अवीव। इजरायल पर भारत का बहुत बड़ा कर्ज है। दरअसल, भारत ने 100 साल पहले इजरायल के हाइफा शहर को तुर्कों से आजाद कराया था। इजरायल ने ओटोमन शासन से मुक्ति में भारतीय सैनिकों की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बीते सोमवार को हाइफा नगरपालिका अधिकारियों ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हाइफा की लड़ाई में बहादुरी से लड़ने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इजरायल स्थित भारतीय दूतावास ने हाइफा युद्ध की 107वीं वर्षगांठ मनाई गई, जिसमें ये बातें कही गईं।

हाइफा शहर के मेयर योना याहाव ने यह ऐलान किया कि स्थानीय स्कूलों में इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा ताकि यह सच्चाई सामने आए। इन किताबों में यह बताया जाएगा कि हाइफा शहर को आजाद कराने वाले अंग्रेज नहीं, बल्कि भारतीय सैनिक थे। शहीद सैनिकों की वीरता को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित एक समारोह में भारतीय कब्रिस्तान में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए याहाव ने कहा-मेरा जन्म और स्नातक स्तर की पढ़ाई इसी शहर में हुई। वर्षों तक हमें यही पढ़ाया जाता रहा कि हाइफा को अंग्रेजों ने आजाद कराया था। एक दिन ऐतिहासिक सोसायटी के एक सदस्य मेरे घर आए और मुझे बताया कि एक व्यापक शोध से यह साबित हो गया है कि इस शहर को ओटोमन साम्राज्य से अंग्रेजों ने नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों ने आजाद कराया था।

हाइफा की लड़ाई को अब इतिहास के अंतिम महान घुड़सवार अभियानों में से एक माना जाता है। भालों और तलवारों से लैस भारतीय रेजिमेंटों ने माउंट कार्मेल की खड़ी ढलानों को पार करके ओटोमन सेनाओं को खदेड़ दिया। कठिन बाधाओं के बावजूद उन्होंने पूरे शहर को सुरक्षित कर लिया। इस वीरतापूर्ण अभियान को उसकी असाधारण बहादुरी और रणनीतिक प्रभाव के लिए याद किया जाता है। 
 
विकीपीडिया के अनुसार, हाइफा की लड़ाई 23 सितंबर 1918 को लड़ी गई। इस लड़ाई में राजपूताने की सेना का नेतृत्व जोधपुर रियासत के सेनापति मेजर दलपत सिंह ने किया। अंग्रेजो ने जोधपुर रियासत की सेना को हाइफा पर कब्जा करने के आदेश दिए। आदेश मिलते ही जोधपुर रियासत के सेनापति दलपत सिंह ने अपनी सेना को दुश्मन पर टूट पड़ने के लिए निर्देश दिया। यह सेना दुश्मन पर विजय प्राप्त करने के लिए बंदूकें, तोपों और मशीन गन के सामने अपने छाती अड़ाकर अपनी परंपरागत युद्ध शैली से बड़ी बहादुरी के साथ लड़ी। इस लड़ाई में जोधपुर की सेना के करीब 900 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए। आखिरकार जीत भारतीयों को मिली, जिन्होंने हाइफा पर कब्जा कर लिया। इस तरह से हाइफा पर कब्जा जमाए 400 साल पुराने ओटोमन साम्राज्य का अंत हो गया।

न्यूजऑन एयर की एक खबर के अनुसार, इजरायल में भारतीय राजदूत जेपी सिंह ने कहा कि यह एकमात्र ऐसा रिकॉर्डेड उदाहरण है, जहां किसी घुड़सवार सेना ने इतनी तेजी से किसी किलेबंद शहर पर कब्जा किया हो। उन्होंने बताया कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 74,000 से ज्यादा भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी, जिनमें से 4,000 से ज्यादा पश्चिम एशिया में शहीद हुए।

1918 में हाइफा को आजाद कराने वाले तत्कालीन जोधपुर, मैसूर और हैदराबाद लांसर्स के भारतीय सैनिकों के साहस और वीरता को सम्मानित किया। इस समारोह में राजदूत जेपी सिंह, हाइफा के मेयर योना याहाव जैसी हस्तियां मौजूद थीं। इसके अलावा, एक सोशल मीडिया पोस्ट में, इजरायल स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि इस भूमि के लिए भारतीय सैनिकों का बलिदान एक ऐसी विरासत है जो भारत और इज़राइल के बीच दोस्ती के अटूट बंधन को मजबूत करती रहती है।