नियमों की हत्या बनी छह लोगों की मौत की वजह, चालक ने बस को ग्रीन जोन के बजाय यमुना एक्सप्रेस-वे पर बीच रास्ते मेन लेन के सहारे रोका था, कंटेनर के रौंदे जाने से शव बुरी तरह कुचल गये थे, शिनाख्त में घंटों लगे

मथुरा। यमुना एक्सप्रेस-वे पर एक बार फिर सवालों की लाशें बिछ गईं। मथुरा के सुरीर थाना क्षेत्र में माइल स्टोन 88 पर जो हुआ, वह केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि नियमों की खुली हत्या थी। जहां बस को ग्रीन जोन या टोल प्लाजा के पास रुकना चाहिए था, वहां चालक ने बेखौफ होकर एक्सप्रेस-वे की मेन लेन के किनारे बस खड़ी कर दी। इसी घोर लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि बस से उतरकर सड़क किनारे खड़े छह यात्रियों को तेज रफ्तार कंटेनर ने रौंद डाला और छह परिवार हमेशा के लिए उजड़ गए।

Feb 7, 2026 - 09:49
Feb 7, 2026 - 09:59
 0
नियमों की हत्या बनी छह लोगों की मौत की वजह, चालक ने बस को ग्रीन जोन के बजाय यमुना एक्सप्रेस-वे पर बीच रास्ते मेन लेन के सहारे रोका था, कंटेनर के रौंदे जाने से शव बुरी तरह कुचल गये थे, शिनाख्त में घंटों लगे
यही वह बस, जो हादसे का शिकार हुई।

दुर्घटना शनिवार तड़के ढआई बजे बाद की बताई जा रही है। दिल्ली के नांगलोई से यात्रियों को लेकर एक निजी स्लीपर कोच बस कानपुर जनपद के रसूलाबाद जा रही थी। जैसे ही बस सुरीर थाना क्षेत्र अंतर्गत यमुना एक्सप्रेस-वे के माइल स्टोन 88 के पास पहुंची, कुछ यात्रियों ने लघुशंका के लिए बस रुकवाने की बात कही।

नियमों के मुताबिक बस को एक्सप्रेस-वे के निर्धारित ग्रीन जोन या टोल प्लाजा के पास रोका जाना चाहिए था, लेकिन बस चालक ने नियमों की परवाह किए बिना बस को मेन लेन के बिल्कुल किनारे खड़ा कर दिया। बस से आधा दर्जन से अधिक यात्री उतरकर सड़क किनारे खड़े हो गए।

इसी दौरान दिल्ली से कानपुर की ओर जा रहा एक तेज रफ्तार कंटेनर, जिसकी गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक बताई जा रही है, अनियंत्रित होकर बस के पिछले हिस्से से जा टकराया। टक्कर इतनी भीषण थी कि सड़क किनारे खड़े यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कंटेनर उन्हें रौंदता हुआ आगे निकल गया।

हादसे के बाद घटनास्थल पर दिल दहला देने वाला दृश्य था। औरैया निवासी सोनू, बस्ती के देवेश, कन्नौज के अस्लम और दिल्ली के संतोष के शव क्षत-विक्षत अवस्था में सड़क पर बिखरे पड़े थे। चार मृतकों की पहचान उनके दस्तावेजों से हो सकी, जबकि दो शव इतने बुरी तरह कुचले गए थे कि उनकी पहचान करने में पुलिस को घंटों मशक्कत करनी पड़ी।

सूचना मिलते ही यमुना एक्सप्रेस-वे सुरक्षा दल और सुरीर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। गंभीर रूप से घायल औरैया निवासी अमर दुबे को तत्काल एम्बुलेंस से अस्पताल भिजवाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। पुलिस ने मृतकों के मोबाइल फोन से उनके परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद घटनास्थल और अस्पताल में कोहराम मच गया।

हादसे की खबर मिलते ही यमुना एक्सप्रेस-वे का सुरक्षा अमला और सुरीर थाने की पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई। गंभीर रूप से घायल औरैया निवासी अमर दुबे को बिना देरी किए एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। पुलिस ने जब मृतकों के मोबाइल फोन से उनके परिजनों से संपर्क किया, तो फोन के उस पार से उठी करुण चीखों ने पुलिसकर्मियों की आंखें भी भर दीं। कोई अपने भाई के घर लौटने का इंतजार कर रहा था, तो किसी मां को बेटे के आने की आस थी, लेकिन एक पल की लापरवाही ने कई घरों के चिराग बुझा दिए।

आमतौर पर सर्दियों के मौसम में कोहरे को सड़क हादसों की वजह माना जाता है, लेकिन प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार ने साफ किया कि दुर्घटना के समय मौसम पूरी तरह साफ था। यह हादसा कोहरे का नहीं, बल्कि बेकाबू रफ्तार और असुरक्षित ढंग से बस खड़ी किए जाने का नतीजा है। बस चालक ने एक्सप्रेस-वे के किनारे वाहन खड़ा कर यात्रियों की जान खतरे में डाली, जबकि कंटेनर चालक ने तेज गति पर नियंत्रण नहीं रखा।

पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हादसे के बाद से फरार कंटेनर चालक की तलाश तेज कर दी गई है। दुर्घटना के चलते कुछ समय के लिए एक्सप्रेस-वे पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे बाद में क्रेन की सहायता से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर सुचारू कराया गया।इस हादसे ने एक बार फिर एक्सप्रेस-वे पर बस चालकों की मनमानी और प्रशासनिक निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लापरवाह कंटेनर चालक की जिम्मेदारी तो बनती ही है, लेकिन उससे कहीं अधिक दोषी वह बस चालक है, जिसने यात्रियों की जान को जोखिम में डालते हुए मेन लेन के किनारे बस खड़ी कर दी। सवाल यह है कि आखिर कब तक एक्सप्रेस-वे पर नियमों की अनदेखी लोगों की जान लेती रहेगी।

मोबाइल पर ही चीख पड़े मृतकों के परिजन

हादसे की खबर मिलते ही यमुना एक्सप्रेस-वे का सुरक्षा अमला और सुरीर थाने की पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई। गंभीर रूप से घायल औरैया निवासी अमर दुबे को बिना देरी किए एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। पुलिस ने जब मृतकों के मोबाइल फोन से उनके परिजनों से संपर्क किया, तो फोन के उस पार से उठी करुण चीखों ने पुलिसकर्मियों की आंखें भी भर दीं। कोई अपने भाई के घर लौटने का इंतजार कर रहा था, तो किसी मां को बेटे के आने की आस थी, लेकिन एक पल की लापरवाही ने कई घरों के चिराग बुझा दिए।

बेकाबू रफ्तार और असुरक्षित बस खड़ी करने का नतीजा है हादसा-पुलिस

आमतौर पर सर्दियों के मौसम में कोहरे को सड़क हादसों की वजह माना जाता है, लेकिन प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार ने साफ किया कि दुर्घटना के समय मौसम पूरी तरह साफ था। यह हादसा कोहरे का नहीं, बल्कि बेकाबू रफ्तार और असुरक्षित ढंग से बस खड़ी किए जाने का नतीजा है। बस चालक ने एक्सप्रेस-वे के किनारे वाहन खड़ा कर यात्रियों की जान खतरे में डाली, जबकि कंटेनर चालक ने तेज गति पर नियंत्रण नहीं रखा।

पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हादसे के बाद से फरार कंटेनर चालक की तलाश तेज कर दी गई है। दुर्घटना के चलते कुछ समय के लिए एक्सप्रेस-वे पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे बाद में क्रेन की सहायता से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर सुचारू कराया गया।

SP_Singh AURGURU Editor