चाबहार से भारत ने नहीं खींचे हाथ, अफवाहों पर सरकार का करारा प्रहार, अमेरिकी छूट अप्रैल 2026 तक बरकरार, भारत–ईरान परियोजना पर काम जारी
नई दिल्ली। ईरान के चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर भारत के पीछे हटने की खबरों को केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत न केवल परियोजना से जुड़ा हुआ है, बल्कि अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों में दी गई छूट अप्रैल 2026 तक प्रभावी है। सरकार की यह सफाई कांग्रेस के उस आरोप के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाबहार प्रोजेक्ट का नियंत्रण छोड़ दिया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि भारत और अमेरिका इस विषय पर निरंतर संपर्क में हैं और किसी भी तरह का भ्रम वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता।
अमेरिका ने दी है सशर्त छूट
रणधीर जायसवाल ने बताया कि 28 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी वित्त विभाग की ओर से एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें चाबहार पोर्ट परियोजना को लेकर सशर्त प्रतिबंध छूट दी गई है। यह छूट 26 अप्रैल 2026 तक मान्य है। इस व्यवस्था को लेकर हम अमेरिकी पक्ष के साथ लगातार संवाद में हैं।
उन्होंने दो टूक कहा कि चाबहार परियोजना भारत की रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।
10 साल का समझौता, काम जारी
उल्लेखनीय है कि साल 2024 में भारत और ईरान के बीच चाबहार पोर्ट के ‘शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल’ को विकसित करने के लिए 10 वर्षों का दीर्घकालिक समझौता हुआ था।
हालांकि, अमेरिका ने 2018 में दी गई पुरानी छूट को बाद में रद्द कर दिया था, जिससे परियोजना पर काम करने वाली एजेंसियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा पैदा हो गया था। इसके बाद अमेरिका ने पिछले वर्ष भारत को छह महीने की राहत दी थी, जो 29 अक्टूबर से प्रभावी हुई।
कांग्रेस के आरोपों पर सरकार की सफाई
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि भारत ने अमेरिकी दबाव में आकर चाबहार प्रोजेक्ट से दूरी बना ली है। सरकार ने इस आरोप को राजनीतिक और तथ्यहीन बताते हुए कहा कि चाबहार को लेकर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार
चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस पोर्ट के जरिए भारत पाकिस्तान को बाइपास कर सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों से व्यापार और संपर्क बढ़ा सकता है। फिलहाल, अप्रैल 2026 तक भारत यहां बिना किसी अमेरिकी प्रतिबंध के डर के काम जारी रख सकता है।