भारत और छह मुस्लिम देशों के साथ एफटीए पर सहमत, पाकिस्तान-बांग्लादेश को लग सकता है झटका
भारत और 6 अरब देशों के ब्लॉक जीसीसी ने एक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। यह मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से जुड़ा है। इसमें एफटीए को अमल में लाने के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) का जिक्र है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यह जानकारी दी। उन्होंने टीओआर साइनिंग सेरेमनी की अध्यक्षता की।
नई दिल्ली। भारत और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत शुरू करने की शर्तों पर राजी हो गए हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने यह जानकारी दी। गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर भारत और जीसीसी के बीच टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) साइनिंग सेरेमनी की तस्वीरें शेयर की हैं। गुरुवार को भारत और जीसीसी ने एफटीए बातचीत शुरू करने के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर साइन किए। इस सेरेमनी की अध्यक्षता वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने की। ये खबर पाकिस्तान और बांग्लादेश में खलबली पैदा करेगी। वे भारत की ताबड़तोड़ रफ्तार को देख सिर्फ हाथ मलने पर मजबूर हैं। जीसीसी के साथ एफटीए में कामयाबी मिलने पर भारत को अपने एनर्जी सोर्सेज को डायवर्सिफाई करने में मदद मिलेगी।
टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) प्रस्तावित ट्रेड डील के दायरे और तरीकों के बारे में बताएगा। जीसीसी में छह अरब देश शामिल हैं। इनके नाम बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) हैं।
गोयल ने कहा कि इस डील से द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने गोयल के हवाले से बताया कि जीसीसी के साथ ट्रेड पैक्ट से भारत के एनर्जी सोर्स में डायवर्सिफिकेशन लाने में मदद मिलेगी। जीसीसी क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं।
जीसीसी के साथ एफटीए वार्ता से दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर से शुरू होगी। पिछले दो राउंड 2006 और 2008 में दोनों के बीच हुए थे। जीसीसी ने सभी देशों और आर्थिक समूहों के साथ अपनी बातचीत स्थगित कर दी थी। इसलिए तीसरा राउंड नहीं हो पाया।
भारत मुख्य रूप से सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देशों से कच्चा तेल (क्रूड) और प्राकृतिक गैस आयात करता है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बदले में यह इन देशों को मोती, कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर, मेटल, नकली आभूषण, बिजली की मशीनरी, लोहा और स्टील और रसायन निर्यात करता है।
2024-25 में जीसीसी को भारत का निर्यात लगभग 1% बढ़कर 57 अरब डॉलर हो गया, जो 2023-24 में 56.32 अरब डॉलर था। आयात 15.33% बढ़कर 2024-25 में 121.7 अरब डॉलर हो गया, जो 2023-24 में 105.5 अरब डॉलर था। द्विपक्षीय व्यापार 2023-24 में 161.82 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 178.7 अरब डॉलर हो गया है।
पिछले वित्तीय वर्ष में यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था। यूएई को भारतीय एक्सपोर्ट 36.63 अरब डॉलर था। वहीं, इंपोर्ट 63.40 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे 2024-25 में 26.76 अरब डॉलर का ट्रेड डेफिसिट हुआ।
पिछले फाइनेंशियल ईयर में सऊदी अरब भारत का पांचवां सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर था। सऊदी अरब को भारत का एक्सपोर्ट 11.75 अरब डॉलर रहा। इसके मुकाबले में इंपोर्ट 30.12 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसे 2024-25 में 18.36 अरब डॉलर का ट्रेड डेफिसिट हुआ।
पिछले फाइनेंशियल ईयर में कतर भारत का 22वां सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर था। एक्सपोर्ट 1.68 अरब डॉलर था। वहीं, इंपोर्ट कुल 12.46 अरब डॉलर था। इससे 2024-25 में 10.78 अरब डॉलर का ट्रेड डेफिसिट हुआ। भारत मुख्य रूप से कतर से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) इंपोर्ट करता है। वहीं, अनाज, मांस, मछली, केमिकल और प्लास्टिक एक्सपोर्ट करता है।
2024-25 में ओमान भारत का 28वां सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बना रहा। कुल एक्सपोर्ट 4 अरब डॉलर था। वहीं, कुल इंपोर्ट 6.54 अरब डॉलर रहा। ट्रेड डेफिसिट 2.48 अरब डॉलर था।
2024-25 में कुवैत भारत के ट्रेडिंग पार्टनर्स में 29वें स्थान पर था। एक्सपोर्ट 1.93 अरब डॉलर था। कुल इंपोर्ट 8.28 अरब डॉलर था। इसके चलते 6.35 अरब डॉलर का ट्रेड डेफिसिट हुआ।
इस बीच, पिछले फाइनेंशियल ईयर में बहरीन भारत का 65वां सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बन गया। इसे भारत का एक्सपोर्ट कुल 79.74 करोड़ डॉलर रहा। इंपोर्ट 84.34 करोड़ डॉलर था। इससे 2024-25 में 4.59 करोड़ का ट्रेड डेफिसिट रहा।