ब्रिटेन में यौन अपराध के मामलों में भारतीय नागरिक सबसे ज्यादा

ब्रिटेन में यौन अपराध में सजा पाने वाले विदेशी नागरिकों में सबसे अधिक संख्या भारतीयों की है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 में यह संख्या 28 थी, जो 257 प्रतिशत बढ़कर 2024 में 100 हो गई। ब्रिटेन सरकार के आंकड़े भारतीयों के लिए एक खराब मैसेज देते हैं।

Aug 27, 2025 - 20:49
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ब्रिटेन में यौन अपराध के मामलों में भारतीय नागरिक सबसे ज्यादा

लंदन। ब्रिटेन में रहने वाले भारतीयों के नाम पर एक ऐसा रेकॉर्ड जुड़ा है, जो उनके लिए शर्मिंदगी की वजह है। ब्रिटेन में यौन अपराधों में सजा पाने वाले विदेशी नागरिकों में सबसे ज्यादा तेजी भारतीयों में दर्ज की गई है। ब्रिटेन के न्याय मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2021 और 2024 के बीच यानी चार साल में भारतीय नागरिकों के यौन अपराधों की दोषसिद्धि में विदेशी नागरिकों की तुलना में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई। इस दौरान यौन अपराधों के लिए भारतीयों की दोषसिद्धि में 257 प्रतिशत वृद्धि हुई। यह संख्या 2021 के 28 मामलों से बढ़कर 2024 में 100 तक पहुंच गई। भारत के बाद नाइजीरिया और इराक के लोग दोषी मिले।

ब्रिटिश न्याय मंत्रालय के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2021 और 2024 के बीच यौन अपराधों के लिए दोषी करार दिये गए विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या में 257 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि के दौरान यौन अपराधों के लिए दोषी करार दिये गए विदेशी नागरिकों की संख्या में कुल 62 प्रतिशत की वृद्धि हुई।  
 
 ये आंकड़े ब्रिटेन के न्याय मंत्रालय के पुलिस राष्ट्रीय कंप्यूटर से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित हैं। थिंक टैंकसेंटर फॉर माइग्रेशन कंट्रोल (सीएमसी) ने आंकड़ों का विश्लेषण किया है। सीएमसी ने कहा, 'यौन अपराधों के लिए दोषी करार दिये गए विदेशी नागरिकों की संख्या 2021 और 2024 के बीच 62 प्रतिशत बढ़ी है।यह चार साल में 687 से बढ़कर 1,114 हो गई।

सीएमसी का कहना है कि 2021 से ही भारतीय नागरिक इस चार्ट में सबसे ऊपर बने हुए हैं। 2021 में भारतीयों पर ऐसे 28 आपराधिक मामले दर्ज किये गए थे। इसके बाद 2022 में 53, 2023 में 67 और पिछले साल यानी 2024 में भारतीयों पर यौन शोषण के 100 आपराधिक मामले दर्ज किए गए।

2021 और 2024 के बीच भारत के बाद नाइजीरियाई नागरिकों के मामले 166 प्रतिशत, इराकियों के 160 प्रतिशत, सूडानी के 117 प्रतिशत और अफगानियों के 115 प्रतिशत बढ़े हैं। भारत के पड़ोसी देशों का भी इस लिस्ट में नाम है। बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ दर्ज मामलों में इन चार वर्षों में 100 प्रतिशत आई है। बांग्लादेश लिस्ट में छठे स्थान पर हैं। वहीं पाकिस्तानी नागरिक 47 प्रतिशत वृद्धि के साथ 11वें स्थान पर हैं।