त्योहारों और शादी-समारोहों से मजबूत होती भारत की अर्थव्यवस्था
विश्व भर में भारत ही एक ऐसा इकलौता देश है जहां पर वर्ष भर त्योहारों का आयोजन होता रहता है। इसके अतिरिक्त भारतीय परिवारों में शादी-समारोह एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन त्योहार की तरह ही स्वरुप मनाये जाने की बड़ी परम्परा शुरु से ही है। अब यही आयोजन भारत की अर्थव्यवस्था को निरंतर मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
अभी हाल ही में पंचदिवसीय त्योहार दीपावली का आयोजन घर-घर में हुआ। इस त्योहार के दौरान प्रत्येक परिवार भारी खरीदारी करता है। पूर्व में इस त्योहार के पहले दिन धनतेरस पर बर्तन खरीदने के साथ सोना-चांदी का शुगन माना जाता था, लेकिन अब चलन बदल चुका है। अब कोई वाहन खरीदाना होता है तो धनतेरस की प्रतीक्षा की जाती है।
इस दिन बड़ी संख्या में चौपहिया और दोपहिया वाहन खरीदे जाने लगे हैं, लेकिन धनतेरस पर सोना व चांदी खरीदने की परम्परा समय के साथ बदलाव के बावजूद भी अभी लुप्त नहीं हुई है।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष धनतेरस के अवसर पर बाजार में लगभग चांदी और 253 टन सोना की बिक्री ने एक रिकार्ड बनाया। उधर चौपहिया और दोपहिया वाहन डीलर्स इस धनतेरस का बड़ी बेसब्री के साथ प्रतीक्षा करते हैं। बताया जा रहा है कि केवल आगरा में ही लगभग 2500 चारपहिया वाहनों की बिक्री हुई। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश के अन्य शहरों में कितनी संख्या में वाहनों की बिक्री हुई होगी।
बात करें देश के शेयर बाजार की, जिसमें इस मार्केट से जुड़े सभी शेयरधारक भी अपना बहीखाते में दिवाली से दिवाली का हिसाब रखते हैं। साथ ही लाभ का आंकड़ा जारी करते हैं। पिछली दिवाली से इस दिवाली तक भारत के 18 करोड़ शेयरधारकों ने 134 लाख करोड़ रुपये शेयर बाजार से कमाए।अर्थात हर एक शेयर धारक ने औसत साढ़े सात लाख रुपये का लाभ अर्जित किया।
अब बात करते हैं भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के साथ सरकारी व निजी औद्योगिक कंपनियों के विभिन्न उत्पादों के उच्च विश्वसनीयता की। इन कंपनियों के उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू बाजार के उपभोक्ताओं के बीच विशिष्ट स्थान बना चुके हैं।
ध्यान देने की बात यह है कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियां शेयरधारकों को अपने उत्पाद की बिक्री के आधार पर ही लाभांश देती हैं। इन कंपनियों का लाभांश परिणाम तब सामने होता है जब उत्पादों की बिक्री बड़े स्तर पर होती है।
अन्य इलेक्ट्रानिक उत्पादों, दोपहिया और चारपहिया वाहनों की तो बात ही क्या करें जबकि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2014 के 250 अरब डालर के आंकड़े को बहुत पीछे छोड़ते हुए आज 750 अरब डालर के आंकड़े को पार कर गया है।
यह व्यापार संतुलन को भारत के पक्ष को बताता है। अर्थात भारत आज आयात कम और निर्यात सर्वाधिक कर रहा है जो किसी भी देश की जीडीपी और बढ़ती आर्थिक शक्ति को दर्शाता है।
इस ओर भी ध्यान देना होगा कि भारत में शादी-समारोह का पहला सीजन नवम्बर के मध्य से प्रारम्भ होकर होकर फरवरी-मार्च के मध्य तक रहेगा। प्राप्त आंकड़ों में इस वर्ष लगभग 48 लाख शादियां होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
अब शादी-समारोहों के आयोजनों पर होने वाले खर्च का विश्लेषण करें तो प्रत्येक मां की इच्छा यही होती है कि वह अपनी बेटी को कम से कम पांच बढ़िया साड़ी उसे भेंट करे। हैसियत के अनुसार इन साड़ियों की संख्या अत्यधिक हो जाती है। अब आप केवल साड़ियों की संख्या का अंदाजा लगायें और प्रत्येक बेटी को उसकी मां पांच साड़ियां भेंट करती है तो इस सीजन में 2.40 करोड़ साड़ियों की बिक्री होना तो निश्चित है।
जब साड़ियों की बिक्री इस बड़ी संख्या में होनी है, तब प्रश्न उठता है कि इस सीजन साड़ियों का उत्पादन कितना होगा और इस उत्पादन एवं मांग के चलते कितने लोगों को रोजगार मिलेगा। यह भी विचार करना चाहिए कि कितने कारीगरों को प्रत्यक्ष रोजगार और कितने लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
साड़ियों की छपाई, पैंकिग, धुलाई, ट्रांसपोर्टेशन और बिक्री के लिए कितनी बड़ी संख्या में लोग इस ट्रेड में जुड़ेंगे। इसके अतिरिक्त शादी समारोहों में टेंट, हलवाई, बैंड-बाजे, ट्रांसर्पोटेशन, कैटरिंग आदि ऐसी बहुत से सामानों का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रुप से उपभोग होता है।
अब आप स्वयं ही गणना कर सकते हैं कि भारत का प्रत्येक त्यौहार, शादी-समारोह, धार्मिक एवं अन्य शुभ कार्यक्रमों के आयोजन देश की अर्थ व्यवस्था में कितना बड़ा योगदान करते हुए महती भूमिका निभा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि सितम्बर माह का अक्टूबर 2024 में अप्रत्यक्ष कर (जीएसटी) संग्रह का आंकड़ा 1.87 लाख करोड़ रहा। अब आप केवल आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि अक्टूबर माह का आंकड़ा यानि नवम्बर 2024 में यह अप्रत्यक्ष कर संग्रह का आंकड़ा कितना बढ़ेगा। तत्पश्चात नवम्बर और दिसम्बर के दौरान अप्रत्यक्ष कर संग्रह का आंकड़ा 2.25 लाख करोड़ से अधिक हो जाये तब आश्चर्य नहीं होगा।
हाल ही में प्रधानमंत्री ने कहा था कि दस साल में देश जिस तेजी से आत्मनिर्भरता की नीति और वोकल फार लोकल के मंत्र के साथ आगे बढ़ा है, उससे हमारे स्थानीय और घरेलू बाजार मजबूत हुए हैं। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में वहां के घरेलू बाजार की अहम भूमिका बताया।
स्विस बैंक एसआईजी के सीईओ सैमुअल सिग्रिस्ट का कहना है कि भारतीय घरेलू बाजार में तेजी से व्यापार की स्थापना और प्रोत्साहन को सारी विशेषताएं हैं। डेलाइट इंडिया की होम एवं हाउसहोल्ड मार्केट रिपोर्ट 2024 के अनुसार भारत का घरेलू बाजार 10 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ रहा है। इस तेज गति से वर्ष 2030 तक भारत का घरेलू बाजार लगभग 237 अरब डालर की ऊंचाई पर पहुंच सकता है। स्पष्ट है कि भारत का घरेलू बाजार के ताकत पर भारत की अर्थव्यवस्था सरपट दौड़ने लगी है।
निश्चित रूप से भारत के घरेलू बाजार की मजबूती में वस्तुओं, सेवाओं, कृषि उत्पादों और प्रतिभूतियों की बढ़ती हुई मांग और आपूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके अलावा डिजिटलीकरण, खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता, कृषि का तेज विकास, निर्माण हब बनने की राह, टियर 2 और टियर 3 शहरों की मांग में तेज वृद्धि तक आसान पहुंच, युवा उपभोक्ताओं की बढ़ती क्रयशक्ति के साथ छलांग लगाता सर्विस सेक्टर भी घरेलू बाजार को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उपरोक्त आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि देश के उत्पादों की बिक्री तभी होगी जब उपभोक्ताओं के पास यदि खर्च करने के लिए जेब में पैसा होगा जबकि हमारे देश का विपक्ष कहता आ रहा है कि मोदी सरकार की नीतियों के चलते भारत का आर्थिक तंत्र बर्बाद हो गया है।
इस पर शेयर बाजार के जारी लाभांश के आंकड़े इन विपक्षी जुमलों को आईना दिखाने जैसे हैं, इसलिए निश्चिंत रहना है कि हमारा भारत राष्ट्र वर्तमान में सर्वाधिक सुरक्षित हाथों में है और विपक्ष एवं मीडिया के एक वर्ग के झूठे दुष्प्रचार और इकोसिस्टम से सचेत रहने की आवश्यकता है।
अब कोई शक या संन्देह नहीं रहना चाहिए कि भारत स्वयं में दुनिया का सबसे बड़ा बाजार होने के कारण भारत की अर्थव्यवस्था की सींचने और स्थानीय बाजार को आगे बढ़ाने के साथ मजबूत बनाने में आत्मनिर्भर नीति भारत बड़ी ताकत बनता जा रहा है। इसलिए अपनी सोच को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना आवश्यक होता जा रहा है।
- पराग सिंहल
प्रबन्ध संपादक,
कर जानकारी (पाक्षिक पत्रिका)