'कोलंबो सीक्रेट मीटिंग' पर भारत का बड़ा बयान: विदेश मंत्रालय ने कहा- न कोई आधिकारिक भूमिका, न कोई विशेष अहमियत

नई दिल्ली। श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में भारत और पाकिस्तान के बीच कथित 'सीक्रेट मीटिंग' को लेकर चल रही चर्चाओं पर भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि इस प्रकार के 'ट्रैक-2 डायलॉग' दुनिया के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर आयोजित होते रहते हैं। भारत सरकार का इन कार्यक्रमों से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है और इनमें शामिल भारतीय प्रतिनिधि सरकार का पक्ष या नीति प्रस्तुत नहीं करते। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार की नजर में ऐसी बैठकों की कोई विशेष अहमियत नहीं है।

Jun 30, 2026 - 11:38
Jun 30, 2026 - 13:09
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'कोलंबो सीक्रेट मीटिंग' पर भारत का बड़ा बयान: विदेश मंत्रालय ने कहा- न कोई आधिकारिक भूमिका, न कोई विशेष अहमियत

हाल के दिनों में कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच कोलंबो में एक अनौपचारिक बैठक आयोजित हुई, जिसमें दोनों देशों के पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व राजनयिक और नीति विशेषज्ञ शामिल हुए। रिपोर्टों में इसे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया था।

इस संबंध में पूछे गए सवाल पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि उन्होंने भी ऐसी खबरें देखी हैं और उन्हें इसकी जानकारी है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में अलग-अलग विषयों पर इस तरह के दर्जनों कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते रहते हैं। इनमें कुछ भी नया या असामान्य नहीं है। ये निजी संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम होते हैं और भारत सरकार का उनसे कोई आधिकारिक संबंध नहीं होता।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से न तो इन बैठकों में कोई आधिकारिक भागीदारी होती है और न ही किसी प्रकार का समर्थन दिया जाता है। भारत से यदि कोई पूर्व राजनयिक, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी या सिविल सोसायटी का सदस्य ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेता है, तो वह केवल अपने व्यक्तिगत विचार रखता है। उनके विचारों को किसी भी स्थिति में भारत सरकार का आधिकारिक दृष्टिकोण नहीं माना जा सकता।

विक्रम मिस्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सरकार की ओर से कौन और किस हैसियत से शामिल होता है, इस पर वह टिप्पणी नहीं कर सकते। लेकिन भारत सरकार ऐसे कार्यक्रमों को आधिकारिक महत्व नहीं देती और न ही उन्हें अपनी विदेश नीति का हिस्सा मानती है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कोलंबो के एक होटल में करीब दो दिनों तक चली इस बैठक में भारत की ओर से पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे, इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष राम माधव तथा पूर्व राजनयिक रुचि घनश्याम शामिल हुए थे। वहीं पाकिस्तान की ओर से विदेश मंत्रालय के अधिकारी सज्जाद हैदर खान, पूर्व राजदूत शेरी रहमान और सेवानिवृत्त मेजर जनरल इसफंदियाम अली खान पटौदी ने भाग लिया था।

रिपोर्टों में दावा किया गया कि बैठक के दौरान सीमा पार आतंकवाद, जल बंटवारा, भारत-पाकिस्तान के बीच भविष्य में सैन्य टकराव रोकने के उपाय तथा आपसी विश्वास बहाली जैसे विषयों पर चर्चा हुई। हालांकि भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इन चर्चाओं का सरकार की आधिकारिक नीति या निर्णयों से कोई संबंध नहीं है।

विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि कोलंबो में हुई कथित 'ट्रैक-2' बैठक को भारत सरकार किसी औपचारिक कूटनीतिक वार्ता का दर्जा नहीं देती और इसे निजी स्तर पर आयोजित संवाद का हिस्सा मानती है।

SP_Singh AURGURU Editor