सूचना आयोग ने बांग्लादेश को चूना निर्यातकों की जानकारी देने से किया इंकार

   केंद्रीय सूचना आयोग ने बांग्लादेश को चूना पत्थर निर्यात करने वाले निर्यातकों की जानकारी देने से इनकार कर दिया है। आयोग ने इसे व्यावसायिक गोपनीयता का मामला बताया है। यह जानकारी सार्वजनिक करने से निर्यातकों की प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान पहुंच सकता है। इस मामले में कोई बड़ा जनहित नहीं है।  

Jan 4, 2026 - 18:30
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सूचना आयोग ने बांग्लादेश को चूना निर्यातकों की जानकारी देने से किया इंकार

नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने बांग्लादेश को बेचे गए चूना पत्थर के निर्यातकों की विस्‍तृत जानकारी देने से इनकार को सही ठहराया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मेघालय से बांग्लादेश को निर्यात किए गए चूना पत्थर (लाइमस्‍टोन) के निर्यातकों का ब्‍योरा मांगा गया था। आयोग ने कहा कि यह जानकारी ' व्यावसायिक गोपनीयता ' (कमर्शियल कॉन्फिडेंस) के दायरे में आती है। इसे सार्वजनिक करने से निर्यातकों की प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान पहुंच सकता है। सीआईसी ने यह भी कहा कि इस मामले में ऐसा कोई बड़ा जनहित नहीं है जो आरबीआई अधिनियम की धारा 8(1)(d) के तहत मिलने वाली छूट को खत्म कर सके। यह धारा तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान पहुंचाने वाली जानकारी के खुलासे से छूट देती है। इस तरह याचिका खारिज कर दी गई।

यह मामला तब सामने आया जब RTI आवेदक डब्ल्यू मैथ्यू मावदखाप ने शिलांग कस्टम्स डिवीजन के डिप्‍टी कमीशनर कार्यालय से 2023-24 वित्तीय वर्ष के दौरान भोलागंज लैंड कस्टम्स स्टेशन से बांग्लादेश को चूना पत्थर निर्यात करने वाले निर्यातकों के नाम और पते मांगे थे। कस्टम्स विभाग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए यह जानकारी देने से इनकार कर दिया था। आवेदक की पहली अपील भी खारिज हो गई थी। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में दूसरी अपील दायर की। इसमें पिछले आदेशों को चुनौती दी।  

सीआईसी के सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने आवेदक की अपील खारिज करते हुए कहा कि मांगी गई जानकारी में निर्यातकों के नाम, पते और 2023-24 वित्तीय वर्ष के दौरान बांग्लादेश को निर्यात किए गए चूना पत्थर की मात्रा शामिल थी। आयोग ने माना कि इस तरह के निर्यातक-वार व्यापार के आंकड़े व्यावसायिक जानकारी होते हैं। इन्‍हें आमतौर पर व्यावसायिक और नियामक ढांचों में गोपनीय माना जाता है। सीआईसी ने इस बात पर भी जोर दिया कि एक्‍सपोर्टर-स्‍पेसिफिक ट्रेड वॉल्‍यूम्‍स का खुलासा उनके प्रतिस्पर्धियों को उनकी व्यावसायिक गतिविधियों के बारे में रणनीतिक जानकारी दे सकता है। यह उनकी प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है। आदेश में कहा गया है कि ऐसी जानकारी में स्वाभाविक रूप से व्यावसायिक रूप से संवेदनशील विवरण होते हैं।

सीआईसी ने आगे कहा कि रेगुलेटरी अथॉरिटीज निजी संस्थाओं से वैधानिक अनुपालन के हिस्से के रूप में भरोसेमंद क्षमता में व्यावसायिक जानकारी प्राप्त करते हैं। ऐसी जानकारी को पब्लिक डोमेन में अंधाधुंध जारी करने से ऐसे इंटरैक्शन में अपेक्षित विश्वास और गोपनीयता कम हो जाएगी।

सुनवाई के दौरान आवेदक आयोग के सामने पेश नहीं हुए। न ही उन्होंने कोई ऐसी सामग्री प्रस्तुत की जिससे यह साबित हो सके कि कोई बड़ा जनहित है जो इस जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए जरूरी हो। तिवारी ने बताया कि ऐसे किसी भी औचित्य के अभाव में आयोग को केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (FAA) के समान निष्कर्षों को बदलने का कोई कारण नहीं मिला।

कस्टम्स विभाग ने यह भी बताया कि बांग्लादेश को निर्यातक-वार चूना पत्थर निर्यात के आंकड़े सार्वजनिक प्रसार के लिए नहीं हैं। तब तक जब तक कि कानून की ओर से जरूरी न हो या संबंधित तीसरे पक्षों की सहमति से खुलासा न किया जाए। जानकारी देने से इनकार में कोई कमी न पाते हुए आयोग ने माना कि लागू की गई छूट 'कानूनी रूप से टिकाऊ' है और अपील खारिज कर दी।

भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र और बांग्लादेश के बीच व्यापार में पारंपरिक रूप से चूना पत्थर और पत्थर के चिप्स (स्‍टोन चिप्‍स) जैसी वस्तुएं शामिल हैं। खनिज संसाधनों से समृद्ध मेघालय बांग्लादेश को चूना पत्थर और बोल्डर का निर्यात करता है। मेघालय की बांग्लादेश के साथ 443 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो सीमा पार खनिज व्यापार को राज्य की एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि बनाती है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे व्यावसायिक गोपनीयता के नियम आरटीआई के तहत जानकारी के खुलासे को सीमित कर सकते हैं, खासकर जब जनहित का कोई बड़ा मामला सामने न आए।