अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवसः हर चाल में छिपा है सच, शतरंज की बिसात से राजनीति की चालाकी तक

अनादिकाल से भारत में राजा-महाराजा, रंक-अमीर, किसान-नौकरीपेशा लोग अपने मनोरंजन के लिए बिसात, चोपड़ और शतरंज की बिसात बिछाकर खेल खेलते रहे हैं। इतिहास के पन्नों को अगर पलटें तो पता चलता है कि इसी शतरंज की बिसात से लोगों ने अपने बौद्धिक विकास के साथ-साथ रणनीतियां भी तय कीं।

Jul 20, 2025 - 19:47
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अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवसः हर चाल में छिपा है सच, शतरंज की बिसात से राजनीति की चालाकी तक

शतरंज का खेल बताता है कि लोकतंत्र हो या तानाशाही, मरना तो आम आदमी को ही है। राजा और वज़ीर को बचाने का काम करते हैं पैदल सैनिक, उनके साथ ऊँट, घोड़े और हाथी, यानि सैन्यबल। ये आम जनता और उनके कर-भुगतान का प्रतीक हैं।

आज भी यही खेल राजनीति के गलियारों में चालू है

आज भी हम देखते हैं कि वर्तमान समय के राजा-महाराजा (राजनीतिक नेता) पहले जमाने के शासकों से कम विलासितापूर्ण और वैभवशाली जीवन नहीं जीते। वे आम आदमी पर टैक्स के बोझ और अपनी राजनीतिक बातों की चालों से उसे इस कदर उलझा देते हैं कि वह अपनी समस्याओं और अधिकारों की बात ही न कर सके।

जब तक आम आदमी किसी विषय पर सोचकर अपनी बात रखने की हिम्मत करता है, तब तक राजनीतिक लोग स्थानीय स्तर से लेकर शीर्ष तक अपनी भाषा बदल लेते हैं, चालें बदल देते हैं। आज के भारत में यह बहुत आम बात हो गई है। इन राजनीतिक चालबाजों ने तो अब शतरंज के खिलाड़ियों को भी मात दे दी है।

अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस 2025 का विषय

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस का विषय ‘हर चाल मायने रखती है’ बहुत सार्थक है। यह हमें याद दिलाता है कि बिसात पर और जीवन में, हर निर्णय हमारी यात्रा को आकार देता है।

अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस कब मनाया जाता है?

अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस 1966 से मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1924 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (एफआईडीई) की स्थापना की तारीख को चिह्नित करने के लिए 20 जुलाई को विश्व शतरंज दिवस के रूप में घोषित किया।

भारत का शतरंज में दबदबा

आज भी विश्व में शतरंज के खिलाड़ियों में भारत का दबदबा बना हुआ है, जो विश्वव्यापी रूप ले चुका है। एक समय था जब इसका प्रचलन कुछ कम हो गया था, लेकिन कोविड काल के बाद से शतरंज जैसे इंडोर खेल का प्रचलन फिर से बढ़ा है। यह खेल न केवल बौद्धिक विकास करता है, बल्कि सहनशीलता, सोचने-समझने की क्षमता और स्मरण शक्ति को भी मजबूत करता है।

खेल जगत को शतरंज को बनाना चाहिए प्रशिक्षण का हिस्सा

सभी खिलाड़ी, चाहे वे किसी भी खेल से जुड़े हों, उन्हें शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक संतुलन और रणनीतिक सोच के लिए शतरंज अवश्य खेलना चाहिए। शतरंज से बौद्धिक विकास के साथ धैर्य और योजना बनाने की क्षमता भी बढ़ती है।

सभी शतरंज खिलाड़ियों को आज के दिन की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई। इसी उम्मीद के साथ कि शतरंज में चाल चलना ठीक है, पर आम आदमी के साथ जो राजनीतिक लोग चालें चलकर अपने स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं, वैभवशाली बन रहे हैं, उन्हें संयम रखना चाहिए।

-राजीव गुप्ता- जनस्नेही कलम से
लोक स्वर, आगरा।
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SP_Singh AURGURU Editor