इटली में गाजा युद्ध के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग: ट्रेनें रोकी गईं, बंदरगाह ठहरे

इटली में गाजा में इज़राइल के सैन्य अभियान के विरोध में आयोजित आम हड़ताल ने देशभर में व्यापक हलचल मचा दी है। हजारों लोगों और छात्रों ने सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया और इटली सरकार से इज़राइल के साथ व्यापारिक और सैन्य संबंधों को समाप्त करने की मांग की। दूसरी ओर इटली की सरकार फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने के लिए तैयार नहीं है।

Sep 23, 2025 - 14:36
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इटली में गाजा युद्ध के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग: ट्रेनें रोकी गईं, बंदरगाह ठहरे

यह विरोध प्रदर्शन इटली की ग्रासरूट यूनियनों द्वारा आहूत किया गया था, जिसमें हजारों कार्यकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया। रोम, मिलान, बोलोग्ना, जेनोआ, लिवोर्नो और पालेर्मो जैसे प्रमुख शहरों में हड़ताल और विरोध प्रदर्शन हुए। रोम में 20,000 से अधिक लोग टर्मिनी रेलवे स्टेशन के बाहर इकट्ठा हुए, जबकि मिलान में 50,000 से अधिक प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। बोलोग्ना में भी 10,000 से अधिक लोग गाजा के समर्थन में सड़कों पर थे।

प्रदर्शनकारियों ने इटली सरकार से इज़राइल के साथ व्यापारिक और सैन्य संबंधों को समाप्त करने की मांग की। उन्होंने 'फ्री फिलिस्तीन' के नारे लगाए और फिलिस्तीनी झंडे लहराए।

जेनोआ और लिवोर्नो के बंदरगाहों पर काम करने वाले मजदूरों ने भी इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने जहाजों को रोककर इटली के माध्यम से इज़राइल को हथियारों की आपूर्ति को बाधित करने का प्रयास किया।

मिलान में प्रदर्शनकारियों ने रेलवे स्टेशन का मुख्य द्वार तोड़ने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पेपर स्प्रे और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी घायल हुए और कई को गिरफ्तार किया गया।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इन प्रदर्शनों की आलोचना करते हुए इसे 'वामपंथी कट्टरपंथी यूनियनों की राजनीति' करार दिया। उन्होंने कहा कि हिंसा और विध्वंस से गाजा में लोगों की मदद नहीं हो सकती। हालांकि, उन्होंने इज़राइल के खिलाफ सैन्य अभियान की आलोचना की है, लेकिन फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की मांग को खारिज किया है।

इज़राइल के सैन्य अभियान के कारण गाजा में अब तक 65,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस संघर्ष को 'मानवता के खिलाफ अपराध' करार दिया है।

SP_Singh AURGURU Editor