कुलदीप सेंगर की बेटी की भावुक चिट्ठी, कहा- अब भरोसा टूट रहा है  

उन्नाव रेप मामले में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी ने सोशल मीडिया पर न्याय व्यवस्था, समाज और संस्थानों पर टूटते विश्वास को लेकर एक भावुक पोस्ट साझा की है।

Dec 29, 2025 - 18:31
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कुलदीप सेंगर की बेटी की भावुक चिट्ठी, कहा- अब भरोसा टूट रहा है  

 
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व भाजपा नेता कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इस बीच कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी डॉ. इशिता सेंगर ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक और पीड़ादायक पोस्ट साझा की है। इस पोस्ट में उन्होंने खुद को एक बेटी के रूप में बताते हुए न्याय व्यवस्था, समाज और संस्थानों के प्रति अपने टूटते विश्वास को शब्दों में पिरोया है।

अपने खुले पत्र में उन्होंने लिखा कि उनका परिवार पिछले आठ वर्षों से चुपचाप और धैर्य के साथ न्याय का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा कानून, संविधान और संस्थाओं पर भरोसा किया और कभी शोर, प्रदर्शन या मीडिया ट्रायल का रास्ता नहीं अपनाया।

डॉ. इशिता सेंगर ने दर्द जताते हुए कहा कि उन्हें एक इंसान या बेटी के रूप में नहीं, बल्कि केवल एक भाजपा विधायक की बेटी के रूप में देखा जाता है। उनका कहना है कि इस एक पहचान ने उनकी पूरी मानवता को जैसे मिटा दिया है और उन्हें अपनी बात रखने के अधिकार से भी वंचित कर दिया गया।  

पोस्ट में उन्होंने यह भी बताया कि बीते वर्षों में सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार अपमान, नफरत और अमानवीय टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने लिखा कि इस तरह की प्रतिक्रियाएं किसी भी व्यक्ति को अंदर से तोड़ देती हैं।

डॉ.  इशिता सेंगर ने स्पष्ट किया कि उनका परिवार इसलिए शांत रहा क्योंकि उन्हें विश्वास था कि सच को शोर की जरूरत नहीं होती। न तो उन्होंने विरोध प्रदर्शन किए और न ही टीवी बहसों में हिस्सा लिया, क्योंकि उन्हें लगता था कि कानून अपना काम करेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से उन्होंने हर संभव दरवाजा खटखटाया, प्रशासन, संस्थान और मीडिया लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उनके अनुसार, ऐसा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि तथ्यों या सबूतों में कमी थी, बल्कि इसलिए क्योंकि उनका पक्ष असहज था।

पोस्ट में उन्होंने मौजूदा माहौल पर चिंता जताते हुए कहा कि आज डर का ऐसा वातावरण बना दिया गया है, जिसमें सच की बात करने से लोग कतराते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जनभावनाएं और दबाव साक्ष्यों और प्रक्रिया पर हावी हो जाएं, तो आम नागरिक की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।

अपने पत्र के अंत में डॉ. इश्तिा सेंगर ने कहा कि वे न तो किसी विशेष रियायत की मांग कर रही हैं और न ही सहानुभूति की। उनकी केवल यही अपील है कि कानून बिना डर और दबाव के अपना काम करे, तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो और सच को सच के रूप में स्वीकार किया जाए।

उन्होंने आखिर में लिखा, मैं एक बेटी हूं, जो अब भी इस देश पर विश्वास करती है। कृपया उस विश्वास को टूटने मत दीजिए।


जेल से रिहाई नहीं होगी: सुप्रीम कोर्ट
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय वेकेशन बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट के 23 दिसंबर के आदेश पर रोक लगा दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के आदेश पर रोक के चलते कुलदीप सेंगर को जेल से रिहा नहीं किया जाएगा।

इस फैसले के बाद कुलदीप सेंगर की बेटी ऐश्वर्या सेंगर ने भी गहरी नाराजगी और पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर अपनी बात रखने तक का मौका नहीं दिया गया।

ऐश्वर्या सेंगर ने कहा, आज हम मामले के मेरिट पर अपनी दलीलें शुरू भी नहीं कर पाए। पीड़िता ने अपने बयान कई बार बदले, घटना का समय भी 2 बजे, फिर 6 बजे और आखिर में 8 बजे बताया गया। उन्होंने दावा किया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से यह भी स्पष्ट है कि घटना के समय उनके पिता स्थान पर मौजूद नहीं थे और पीड़िता खुद कॉल पर बात कर रही थी।

2019 में उम्रकैद की सजा मिली थी
गौरतलब है कि 2019 में दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को IPC और POCSO एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें POCSO के तहत 'लोक सेवक' माना था। हालांकि, पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में भी वह अलग केस में जेल में बंद हैं।