37 साल बाद साधु के भेष में मिला आजीवन कारावास का सजायाफ्ता, विशिष्ट सर्विलांस तकनीक से शाहजहांपुर पुलिस ने एमपी के शिवपुरी से दबोचा  

शाहजहांपुर पुलिस ने 37 साल बाद आजीवन कारावास के सजायाफ्ता उस आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जो साधु का भेष धरकर धार्मिक स्थलों पर घूमते हुए फरारी काट रहा था। आधुनिक विशिष्ट सर्विलांस तकनीक और फिंगरप्रिंट डेटाबेस की मदद से पुलिस ने आरोपी को मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित गायत्री शक्तिपीठ से पकड़ा।

Dec 12, 2025 - 21:11
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37 साल बाद साधु के भेष में मिला आजीवन कारावास का सजायाफ्ता, विशिष्ट सर्विलांस तकनीक से शाहजहांपुर पुलिस ने एमपी के शिवपुरी से दबोचा   

-राजीव शर्मा-

शाहजहांपुर। जिले में 37 वर्षों से फरार चल रहे आजीवन कारावास के सजायाफ्ता आरोपी राजेश उर्फ राजू को पुलिस ने आधुनिक विशिष्ट सर्विलांस तकनीक की मदद से मध्य प्रदेश के शिवपुरी क्षेत्र में साधु के वेश में गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने बताया कि तिलहर थाना क्षेत्र में 28 अगस्त 1986 को गंगा दीन (मुनीम) और ओमप्रकाश रस्तोगी अपनी आभूषणों की दुकान पर जा रहे थे। उनके पास दुकान में उपयोग होने वाला तेजाब भी साथ था। रास्ते में आरोपी राजेश उर्फ राजू पहुंचा और दोनों से मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान उसने ओमप्रकाश के हाथ से तेजाब की बोतल छीनकर दोनों पर फेंक दी, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

इस घटना में राजेश के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 326 (तेजाब से हमला) और 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। आरोपी को जेल भेजा गया और 30 मई 1988 को न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास और हत्या के प्रयास में सात वर्ष की अतिरिक्त सजा सुनाई। बाद में उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया और फिर कभी अदालत में हाजिर नहीं हुआ, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया था।

एसपी द्विवेदी के अनुसार फरारी के लंबे समय तक आरोपी पड़ोसी जिलों सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर साधु बनकर रहता रहा। वह हर दो से चार महीने में ठिकाना बदल देता ताकि पुलिस तक उसका सुराग न पहुंचे। अंततः उसने शिवपुरी स्थित गायत्री शक्तिपीठ को अपना स्थायी आश्रय बना लिया, जहां वह साधु के भेष में शांत रूप से रह रहा था।

पुलिस विभाग के पोर्टल नाफीस (नेशनल ऒटोमैटेड फ्रिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) पर मौजूद फिंगरप्रिंट डेटा का मिलान करते हुए और आधुनिक सर्विलांस तकनीक का उपयोग कर पुलिस ने 37 साल बाद आरोपी का सही लोकेशन ट्रेस किया और उसे गिरफ्तार कर लिया। आज गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

SP_Singh AURGURU Editor