₹12 के ग्रीन गैस बिल का झांसा, खाते से उड़ गए ₹28.19 लाख

आगरा में ग्रीन गैस के 12 रुपये के बकाया बिल का झांसा देकर साइबर ठगों ने कंपनी के खाते से 28.19 लाख रुपये पार कर दिए। खुद को ग्रीन गैस का प्रतिनिधि बताकर ठगों ने लिंक और APK फाइल भेजी तथा गुप्त कोड डायल कराकर कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय करा दी। इसके बाद बैंकिंग ओटीपी ठगों के नंबर पर फॉरवर्ड हुए और तीन बार में रकम निकाल ली गई। साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है। पुलिस को ग्रीन गैस के नाम पर 18-20 अन्य लोगों से ठगी की भी जानकारी मिली है।

Sep 23, 2026 - 14:28
 0
₹12 के ग्रीन गैस बिल का झांसा, खाते से उड़ गए ₹28.19 लाख

APK फाइल से लेकर OTP तक ठगों का पूरा खेल, कंपनी के खाते से तीन बार निकली रकम, ठगों ने ऐसे किया मोबाइल हाईजैक

आगरा। ग्रीन गैस का महज 12 रुपये का बकाया बिल चुकाने के नाम पर आगरा में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने खुद को ग्रीन गैस कंपनी का प्रतिनिधि बताकर पहले बकाया बिल का झांसा दिया और फिर पीड़ित को एक लिंक व APK फाइल भेजकर मोबाइल में फर्जी प्रक्रिया पूरी कराई। इसके बाद गुप्त कोड डायल कराकर मोबाइल की कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय करा दी। बैंकिंग से जुड़े ओटीपी भी ठगों के नंबर पर पहुंचने लगे और देखते ही देखते कंपनी के खाते से 28.19 लाख रुपये तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन में निकाल लिए गए।

घटना के सामने आने के बाद साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। शुरुआती जानकारी में आगरा में ग्रीन गैस का नाम इस्तेमाल कर 18 से 20 लोगों के साथ इसी तरह ठगी किए जाने की बात भी सामने आई है।

फोन पर आया बकाया बिल का झांसा

साइबर ठगों ने पीड़ित से संपर्क कर खुद को ग्रीन गैस का प्रतिनिधि बताया। बातचीत के दौरान बताया गया कि गैस कनेक्शन का 12 रुपये का बिल बकाया है और तत्काल भुगतान नहीं किया गया तो कनेक्शन संबंधी समस्या हो सकती है। मामूली रकम सुनकर पीड़ित को ठगों की बात पर ज्यादा संदेह नहीं हुआ। इसके बाद ठगों ने भुगतान या बिल अपडेट करने के नाम पर मोबाइल पर एक लिंक भेजा। इसी के साथ एक APK फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए कहा गया। साइबर अपराधियों ने पूरी प्रक्रिया को इस तरह पेश किया, जैसे यह कंपनी की आधिकारिक सेवा से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया हो।

गुप्त कोड डायल कराया, सक्रिय कर दी कॉल फॉरवर्डिंग

ठगों का असली खेल इसके बाद शुरू हुआ। पीड़ित से मोबाइल में एक गुप्त कोड डायल कराया गया। इसके जरिए उसके मोबाइल नंबर पर कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो गई। इसका फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने मोबाइल नंबर पर आने वाली महत्वपूर्ण कॉल और बैंकिंग से संबंधित संदेशों तक पहुंच बनाने की कोशिश की। कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय होने के बाद बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े ओटीपी भी ठगों के नंबर पर फॉरवर्ड होने लगे। इसके बाद अपराधियों ने बैंक खाते से रकम निकालने की प्रक्रिया पूरी कर ली।

तीन बार में खाते से उड़ाए 28.19 लाख

पुलिस के मुताबिक ठगों ने एक ही बार में पूरी रकम नहीं निकाली। कंपनी के खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 28.19 लाख रुपये निकाल लिए गए। जब खाते से रकम निकलने की जानकारी हुई तो पीड़ित के होश उड़ गए। मामले की जानकारी साइबर पुलिस को दी गई। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, भेजे गए लिंक, APK फाइल और कॉल फॉरवर्डिंग से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।

ग्रीन गैस के नाम पर 18-20 लोगों को बनाया निशाना

जांच में यह भी जानकारी सामने आई है कि साइबर ठगों ने केवल एक व्यक्ति को ही निशाना नहीं बनाया। ग्रीन गैस के नाम पर करीब 18 से 20 लोगों के साथ ठगी किए जाने की जानकारी साइबर पुलिस को मिली है। इससे आशंका है कि ठगों का गिरोह योजनाबद्ध तरीके से गैस उपभोक्ताओं को फोन कर रहा था और बकाया बिल के नाम पर उन्हें जाल में फंसा रहा था। साइबर पुलिस अब ऐसे अन्य मामलों को भी इस नेटवर्क से जोड़कर जांच कर सकती है। इसके लिए संदिग्ध मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।

APK फाइल बन सकती है सबसे बड़ा खतरा

साइबर पुलिस ने लोगों को विशेष रूप से अनजान APK फाइल डाउनलोड नहीं करने की चेतावनी दी है। किसी कंपनी, बैंक या सरकारी विभाग के नाम पर फोन आने पर भी उसके कहने पर कोई संदिग्ध एप इंस्टॉल नहीं करना चाहिए। पुलिस के मुताबिक अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई गुप्त कोड डायल करना, कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय करना, लिंक खोलना या APK फाइल इंस्टॉल करना भारी पड़ सकता है। यदि किसी सेवा का बिल बकाया है तो संबंधित कंपनी के आधिकारिक ऐप, वेबसाइट या अधिकृत हेल्पलाइन के जरिए ही इसकी पुष्टि करनी चाहिए।

साइबर ठगी में 'छोटी रकम' बन रही बड़ा जाल

इस मामले में साइबर अपराधियों ने भी इसी रणनीति का इस्तेमाल किया। शुरुआत महज 12 रुपये के बकाया बिल से हुई, लेकिन निशाना कंपनी के खाते में जमा लाखों रुपये पर था। यही वजह है कि साइबर विशेषज्ञ लोगों को सलाह देते हैं कि मामूली बिल या छोटे भुगतान के नाम पर भी किसी अनजान व्यक्ति के निर्देश पर मोबाइल में तकनीकी बदलाव न करें। साइबर पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि ठगों ने कंपनी के खाते तक कैसे पहुंच बनाई, कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए ओटीपी किस नंबर पर गया और 28.19 लाख रुपये किन खातों में ट्रांसफर किए गए।