बरेली में उत्तराखंड की संस्कृति का महाकुंभ: तीन दिवसीय 30वां उत्तरायणी मेला कल से, सीएम धामी करेंगे शुभारंभ

बरेली क्लब मैदान में उत्तराखंड की लोक-संस्कृति, परंपरा और एकता का भव्य संगम देखने को मिलेगा। 30वें तीन दिवसीय उत्तरायणी मेले का शुभारंभ मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी वीरेंद्रानंद करेंगे। यह मेला न केवल सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि उत्तराखंड की पहचान, लोकनृत्य, वाद्य यंत्रों और परंपरागत उत्पादों का सशक्त मंच भी बनेगा।

Jan 12, 2026 - 12:15
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बरेली में उत्तराखंड की संस्कृति का महाकुंभ: तीन दिवसीय 30वां उत्तरायणी मेला कल से, सीएम धामी करेंगे शुभारंभ
बरेली में कल से शुरू होने जा रहे उत्तरायणी मेला के बारे में जानकारी देते रमेश शर्मा।

-रमेश कुमार सिंह-

बरेली। बरेली क्लब मैदान में आयोजित 30वां तीन दिवसीय उत्तरायणी मेला मंगलवार से शुरू होगा। मेले के शुभारंभ अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी विरेंद्रानंद मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।

मेला मीडिया प्रभारी रमेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि 13 जनवरी को सुबह 10 बजे बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम कोतवाली से रंग-यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। रंग-यात्रा प्रभारी आनंद रतूड़ी के अनुसार इस वर्ष की रंग-यात्रा ‘अनेकता में एकता’ का सशक्त संदेश देगी। यात्रा में उत्तराखंड के पारंपरिक लोक नृत्य, छोलिया नृत्य, ढोल-नगाड़ों और रणसिंघा की गूंज के साथ छोटे-छोटे बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियां शामिल रहेंगी। यह रंग-यात्रा शहर से होकर मेला ग्राउंड तक पहुंचेगी।

मंगलवार को रंग-यात्रा के समापन के पश्चात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और महामंडलेश्वर स्वामी विरेंद्रानंद द्वारा मेले का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा।
मेले के दूसरे दिन 14 जनवरी को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे।
तीसरे और अंतिम दिन 15 जनवरी को महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और नैनीताल के सांसद अजय भट्ट मेले का उद्घाटन करेंगे।

रमेश शर्मा ने बताया कि मेले में तीनों दिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक निःशुल्क प्रवेश रहेगा। मेला परिसर में उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों, ढोल-नगाड़ों और रणसिंघा का सांस्कृतिक संगीत लगातार गूंजेगा। इसके साथ ही शुद्ध घी, जंगली देशी शहद, गर्म वस्त्र, पारंपरिक खाद्य उत्पादों सहित करीब 150 स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां पहाड़ी संस्कृति की झलक साफ दिखाई देगी।

उत्तरायणी मेला हर वर्ष की तरह इस बार भी उत्तराखंडवासियों के साथ-साथ बरेली और आसपास के जिलों के लोगों के लिए सांस्कृतिक गौरव और उत्सव का केंद्र बनेगा।

SP_Singh AURGURU Editor