जूते के सोल में छिपाकर निकाला महाराष्ट्र टीईटी का पेपर, आगरा से बना लीक का पूरा खेल

महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले में ठाणे पुलिस की करीब 3500 पन्नों की चार्जशीट में आगरा की प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्नपत्र बाहर निकाले जाने का दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, प्रेस कर्मचारियों ने प्रश्नपत्रों के पन्ने जूतों के सोल में छिपाकर बाहर निकाले और इसके बदले करीब 8 हजार रुपये तथा आगरा में प्लॉट का कथित वादा किया गया। चार्जशीट में बिजेंद्र गुप्ता समेत 18 आरोपियों को नामजद किया गया है। 16 आरोपी गिरफ्तार हैं और दो फरार बताए गए हैं। जांच के अनुसार, आगरा से निकले प्रश्नपत्र बिहार के रास्ते आगे नेटवर्क तक पहुंचे थे।

Sep 19, 2026 - 18:37
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जूते के सोल में छिपाकर निकाला महाराष्ट्र टीईटी का पेपर, आगरा से बना लीक का पूरा खेल
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ठाणे पुलिस की 3500 पन्नों की चार्जशीट में 18 आरोपी, आगरा प्रिंटिंग प्रेस के तीन कर्मचारियों पर प्रश्नपत्र बाहर निकालने का आरोप, 16 गिरफ्तार, दो फरार

आगरा। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के पेपर लीक मामले में आगरा कनेक्शन ने परीक्षा व्यवस्था की गोपनीयता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ठाणे पुलिस की ओर से भिवंडी की स्थानीय अदालत में दाखिल करीब 3500 पन्नों की चार्जशीट में दावा किया गया है कि महाराष्ट्र टीईटी के गोपनीय प्रश्नपत्र आगरा की एक प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकाले गए। आरोपियों ने सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देने के लिए प्रश्नपत्रों के पन्नों को मोड़कर जूते के सोल में छिपाया और प्रेस से बाहर ले गए।

पुलिस के मुताबिक, इस काम के लिए प्रेस कर्मचारियों को करीब 8 हजार रुपये दिए गए थे। इसके अलावा आगरा में प्लॉट देने का भी कथित वादा किया गया था। चार्जशीट में कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता समेत कुल 18 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें आगरा की प्रिंटिंग प्रेस के तीन कर्मचारी नरेश कुमार उर्फ निक्की, बाबूलाल कुशवाहा और संजय शर्मा भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार 16 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अशोक साव और प्रकाश मिसाल अभी फरार बताए गए हैं।

15 से 17 जून के बीच प्रेस से निकाले गए प्रश्नपत्र

चार्जशीट के अनुसार, महाराष्ट्र टीईटी के प्रश्नपत्र आगरा स्थित माहीम पटरन प्राइवेट लिमिटेड में छापे जा रहे थे। जांच में आरोप लगाया गया है कि 15 से 17 जून के बीच प्रेस के तीन कर्मचारियों ने प्रश्नपत्रों के पन्नों को मोड़कर जूतों के सोल में छिपाकर बाहर निकाला। पुलिस जांच के मुताबिक, प्रेस में सुरक्षा गार्ड कर्मचारियों के कपड़ों की तलाशी लेते थे, लेकिन जूतों की जांच नहीं की जाती थी। आरोपियों ने कथित तौर पर इसी कमी का फायदा उठाया। इस तरीके से प्रश्नपत्रों को प्रेस से बाहर निकालकर आगे नेटवर्क तक पहुंचाया गया।

खराब प्रिंट वाले पेपर बने लीक का रास्ता

चार्जशीट में प्रेस की अंदरूनी प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है। जांच के मुताबिक, प्रिंटिंग के दौरान जिन प्रश्नपत्रों में स्याही हल्की होती थी या प्रिंटिंग में कोई कमी रह जाती थी, उन्हें डिस्पोजल बॉक्स में डाल दिया जाता था। इन पन्नों की अलग से गिनती नहीं होती थी और बाद में उन्हें नष्ट किया जाना था। पुलिस का आरोप है कि नरेश कुमार उर्फ निक्की, बाबूलाल कुशवाहा और संजय शर्मा ने इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर प्रश्नपत्रों को बाहर निकालने की योजना बनाई। इन कर्मचारियों की मासिक आय करीब 12 से 15 हजार रुपये बताई गई है। चार्जशीट के अनुसार, आर्थिक लालच में उन्होंने प्रश्नपत्र बाहर निकालने में भूमिका निभाई।

दो पेपर के चार सेट, चारों बाहर निकालने का दावा

महाराष्ट्र टीईटी की परीक्षा में नकल रोकने और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए दो पेपर के चार अलग-अलग सेट तैयार किए गए थे। परीक्षा के दिन इनमें से एक सेट का इस्तेमाल होना था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों ने चारों सेट प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकाल लिए। बाद में यही प्रश्नपत्र अलग-अलग लोगों तक पहुंचाए गए। ठाणे पुलिस ने भिवंडी में एक कथित सौदे के दौरान चार सेट बरामद किए थे, जिन्हें महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल ऑफ एग्जामिनेशन (MSCE) के अधिकारियों ने वास्तविक प्रश्नपत्रों से मिलान किया था।

आगरा से बिहार और फिर महाराष्ट्र तक पहुंचा नेटवर्क

जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, प्रेस से निकाले गए प्रश्नपत्र बिहार के सोनू सिंह तक पहुंचाए गए। इसके बाद सोनू सिंह ने इन्हें बिजेंद्र गुप्ता तक पहुंचाया। पुलिस ने बिजेंद्र गुप्ता को इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में बिहार में गुप्ता के एक रिश्तेदार के घर से मूल प्रश्नपत्र बरामद होने को भी अहम साक्ष्य के तौर पर देखा गया है। पुलिस ने वित्तीय लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया है।

भिवंडी में पेपर बेचने की कोशिश से खुला मामला

पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग भिवंडी में परीक्षा का प्रश्नपत्र बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद कोंगांव क्षेत्र में कार्रवाई की गई और आरोपियों के कब्जे से चार सेट बरामद किए गए। जांच के दौरान इन प्रश्नपत्रों का महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल ऑफ एग्जामिनेशन के अधिकारियों से सत्यापन कराया गया। मामला सामने आने के बाद 28 जून को प्रस्तावित महाराष्ट्र TET परीक्षा को स्थगित कर दिया गया था। पुलिस की जांच अब कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और पैसे के लेनदेन की कड़ियों को भी खंगाल रही है। चार्जशीट में आगे की जांच के बाद पूरक चार्जशीट दाखिल किए जाने की संभावना भी बताई गई है।

बिजेंद्र गुप्ता का नाम पहले भी पेपर लीक मामले में आया

चार्जशीट में कथित मुख्य आरोपी बिजेंद्र गुप्ता का नाम शामिल है। पुलिस के अनुसार, उसका नाम पहले ओडिशा के एक पेपर लीक मामले में भी सामने आ चुका है। मौजूदा मामले में पुलिस ने उसके खिलाफ प्रश्नपत्र हासिल करने, नेटवर्क के जरिए उसे आगे पहुंचाने और कथित तौर पर बिक्री की व्यवस्था से जुड़े आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया से होगा।

टीईटी क्यों महत्वपूर्ण है?

शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षक पदों के लिए पात्रता से जुड़ी परीक्षा है। केंद्र स्तर पर सीटीईटी और राज्यों में अलग-अलग स्टेट टीईटी आयोजित किए जाते हैं। महाराष्ट्र TET में कथित पेपर लीक की घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रश्नपत्र की गोपनीयता परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता से सीधे जुड़ी होती है।