अमेरिका फिर करेगा ईरान में हमले, यूरोप में सीक्रेट मीटिंग का दावा, ईरानी आर्मी ने अरब देशों को चेताया
अमेरिका और ईरान में तनातनी लगातार जारी है। सैन्य हमले बंद होने के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य और तेहरान की सत्ता पर बयान देते रहे हैं, जिससे तनाव बढ़ा है।
तेहरान। ईरान ने अमेरिका की ओर से एक बार फिर लड़ाई शुरू करने का अंदेशा जताया है। ईरानी सेना ने कहा है कि उसे ऐसी जानकारी मिली है, जिससे पता चलता है कि अमेरिका ने उनके मुल्क के खिलाफ दोबारा हमले शुरू करने का फैसला किया है। ईरानी सेना ने रविवार को कहा कि अगर उनकी जमीन को निशाना बनाया गया तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। क्षेत्र में अमेरिका के उन सभी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा, जिनका इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए होगा।
ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB पर खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर का बयान जारी किया गया है। बयान में कहा गया है, 'ऐसी जानकारी है कि अमेरिका ने एक यूरोपीय देश में हुई संयुक्त बैठक में कुछ क्षेत्रीय देशों की सहमति से ईरान के खिलाफ फिर सैन्य कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है। वॉशिंगटन ये गलती करता है तो हम क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सेना की तैनाती वाली जगहों पर जवाबी कार्रवाई करेंगे।'
ईरानी सेना के बयान में कहा गया है, 'हम चेतावनी देते हैं कि अगर इस क्षेत्र के देश अपनी दोहरी नीति जारी रखते हुए संप्रभु ईरान के खिलाफ ग्रेट डेविल (अमेरिका) की आक्रामकता का साथ देते हैं तो उन्हें इस बुरे काम में भागीदार माना जाएगा। वे देश फिर ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाओं से संयम या शालीनता की उम्मीद नहीं कर सकते हैं।'
ईरानी आर्मी के इस बयान से पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिलते हैं। अमेरिका अगर एक बार फिर से ईरान को निशाना बनाता है तो फिर ईरान के जवाबी हमलों की वजह से पूरे पश्चिम एशिया में असका असर दिखेगा। यमन और सऊदी में पहले ही लड़ाई चल रही है। ऐसे में नए हमले चीजों को काफी ज्यादा खराब कर सकते हैं।
अमेरिका और ईरान में करीब सात महीने से रुक-रुक कर लड़ाई चल रही है। इस लड़ाई की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब इजरायल-अमेरिका गठबंधन ने ईरान में भीषण हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर, कई शीर्ष नेता, सैकड़ों लोग और 50 से ज्यादा छोटी स्कूली बच्चियां मारी गई थीं। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और अरब देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किए हैं।
करीब चार महीने तक भीषण लड़ाई के बाद 18 जून को अमेरिका और ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत दोनों देशों को 60 दिनों में बातचीत कर अंतिम समझौते तक पहुंचना था। हालांकि यह बहुत सफल नहीं रहा और MoU के बावजूद कई बार दोनों पक्षों ने हमले किए। समझौते के 17 अगस्त को खत्म होने के बाद आगे भी नहीं बढ़ाया गया है।