बवाल के बाद बड़ा एक्शन: बरेली कॉलेज में प्रशासनिक सर्जरी, प्रो. वंदना शर्मा को उप प्राचार्य पद के साथ महिला सशक्तिकरण पर फोकस
-आरके सिंह0 बरेली। भाजपा की राष्ट्रीय महिला नेता पर आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर भड़के विवाद के बाद देश के प्राचीन शिक्षण संस्थानों में शुमार बरेली कॊलेज में पहली बार बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। कॉलेज प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कई अहम पदों पर बदलाव कर व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश की है।
रविवार को प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश राय ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रो. वंदना शर्मा को उप प्राचार्य का पद सौंपा गया है। साथ ही उन्हें स्थापना प्रभारी, नैक प्रभारी और महिला समस्या निवारण प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी भी दी गई है। कॉलेज में करीब 5 हजार छात्र और 9 हजार छात्राएं अध्ययनरत हैं, ऐसे में छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रो. वंदना शर्मा पूर्व में निर्विवाद रूप से चीफ प्रॉक्टर की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं, इसलिए उन्हें यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है।
नए पदाधिकारियों की नियुक्ति
प्रशासनिक फेरबदल के तहत गणित विभाग के प्रो. इंदीवर सिंह चौहान को नया चीफ प्रॉक्टर बनाया गया है। रसायन विभाग के प्रो. एम.बी. कलहंस को डीन स्टूडेंट वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) का पद दिया गया है। वहीं भौतिकी विभाग के प्रो. ए.के. सिंह को मुख्य प्रवेश नियंत्रक और परीक्षा नियंत्रक का प्रभार सौंपा गया है।
दर्शन शास्त्र विभाग के प्रो. आर.के. गुप्ता को आईक्यूएसी समिति का संयोजक नियुक्त किया गया है। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि इस बदलाव से शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों में बेहतर समन्वय स्थापित होगा और प्रवेश व परीक्षा व्यवस्थाएं अधिक सुचारू रूप से संचालित होंगी।
विवाद के बाद लिया गया फैसला
उल्लेखनीय है कि भाजपा की राष्ट्रीय महिला नेता पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर आलोक खरे के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) कार्यकर्ताओं ने 1 अप्रैल को कॉलेज परिसर में जमकर हंगामा किया था।
इस दौरान आक्रोशित छात्राओं ने भी विरोध प्रदर्शन करते हुए चीफ प्रॉक्टर का घेराव किया। मामला तूल पकड़ते ही कॉलेज प्रशासन ने उसी दिन आलोक खरे को पद से हटा दिया था।
प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश राय ने स्पष्ट किया कि यह फेरबदल शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। कॉलेज प्रबंधन का मानना है कि नई टीम के साथ संस्थान में अनुशासन, पारदर्शिता और बेहतर संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।