मोदी कैबिनेट के बड़े फैसले: 2.19 लाख रुपये करोड़ की सात परियोजनाओं को हरी झंडी, सेमीकंडक्टर से लेकर मोबाइल निर्माण और वाराणसी कॉरिडोर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बुधवार को देश के औद्योगिक, बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षेत्र को नई गति देने वाले सात बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। इन परियोजनाओं पर कुल 2,19,353 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इनमें 1,27,500 करोड़ रुपये की सेमीकॉन-2 परियोजना, 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, वाराणसी के लिए विशाल एलिवेटेड कॉरिडोर, रेल लाइन दोहरीकरण और यूरिया निवेश नीति जैसे महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से रोजगार, निवेश, कनेक्टिविटी और घरेलू विनिर्माण क्षमता को व्यापक मजबूती मिलेगी।
कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में सेमीकंडक्टर उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से 1,27,500 करोड़ रुपये की सेमीकॉन-2 परियोजना को मंजूरी दी गई है। यह योजना भारत को चिप निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को और अधिक गति देने के लिए सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को भी मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य देश में मोबाइल निर्माण को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है।
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए नेशनल हाईवे-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच नए लिंक/कनेक्टर कॉरिडोर के निर्माण को भी मंजूरी प्रदान की है। यह परियोजना गंगा नदी के किनारे बेहतर संपर्क उपलब्ध कराएगी और शहर के भीतर यातायात व्यवस्था को सुगम बनाएगी।
करीब 46.039 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में छह-लेन का एलिवेटेड मेन कैरिजवे, अत्याधुनिक केबल-स्टेयड ब्रिज, एक्सट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज-सह-मेजर ब्रिज, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा।
इसके अलावा वरुणा नदी के किनारे बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर को भी मंजूरी मिली है, जिसकी अनुमानित लागत 10,998 करोड़ रुपये होगी। इस परियोजना से वाराणसी में यातायात व्यवस्था और शहरी कनेक्टिविटी को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
रेल अवसंरचना को मजबूत करने के उद्देश्य से पारादीप-हरिदासपुर रेललाइन के दोहरीकरण को भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर 2,542 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे माल परिवहन क्षमता बढ़ने के साथ औद्योगिक और बंदरगाह क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
कैबिनेट ने नेशनल इनवेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026 को भी स्वीकृति प्रदान की। सरकार का मानना है कि इस नीति से देश में यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इन सात परियोजनाओं के माध्यम से भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, आधुनिक परिवहन नेटवर्क, औद्योगिक निवेश और कृषि क्षेत्र से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं को नई दिशा मिलेगी। साथ ही रोजगार सृजन, आर्थिक गतिविधियों और दीर्घकालिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।