मनरेगा बनाम ‘जी राम जी’ बिल: कांग्रेस के हमलों के जवाब में भाजपा का काउंटर अटैक
नई दिल्ली। मनरेगा के स्थान पर प्रस्तावित विकसित भारत ‘जी राम जी’ (VB-GRAMG) बिल को लेकर कांग्रेस के हमलावर रवैये का जवाब देने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने देशभर में बड़ा जन-जागरण अभियान छेड़ने का फैसला किया है। भाजपा की ओर से जनवरी से मार्च तक लगभग दो माह का राष्ट्रव्यापी जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा, जिसका उद्देश्य किसानों, कृषि श्रमिकों और ग्रामीण समाज के बीच तथ्यपरक, प्रमाणिक और सकारात्मक जानकारी पहुंचाना है।
किसानों, कृषि श्रमिकों और ग्रामीण समाज के बीच पहुंचेगी विकसित भारत ग्राम की सोच, जनवरी से मार्च तक चलेगा व्यापक जन-संपर्क अभियान
नई दिल्ली। मनरेगा के स्थान पर प्रस्तावित विकसित भारत ‘जी राम जी’ (VB-GRAMG) बिल को लेकर कांग्रेस के हमलावर रवैये का जवाब देने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने देशभर में बड़ा जन-जागरण अभियान छेड़ने का फैसला किया है। भाजपा की ओर से जनवरी से मार्च तक लगभग दो माह का राष्ट्रव्यापी जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा, जिसका उद्देश्य किसानों, कृषि श्रमिकों और ग्रामीण समाज के बीच तथ्यपरक, प्रमाणिक और सकारात्मक जानकारी पहुंचाना है।
भाजपा के अनुसार, इस अभियान के तहत पार्टी कार्यकर्ता और नेता गांव-गांव जाकर मनरेगा की खामियों और ‘जी राम जी’ बिल के दीर्घकालिक लाभों को आमजन के सामने रखेंगे। पार्टी का कहना है कि मनरेगा केवल 100 दिन की अस्थायी मजदूरी तक सीमित है, जिससे न तो स्थायी आय बनती है और न ही परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो पाती है। काम खत्म होते ही मजदूर फिर बेरोजगारी की स्थिति में पहुंच जाता है।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि मनरेगा में फर्जी हाजिरी, नाम दर्ज लेकिन काम नहीं, मजदूरी का अधूरा या महीनों देरी से भुगतान, और ऐसे कार्य शामिल हैं जिनका गांव को कोई स्थायी लाभ नहीं मिलता। खेती, किसान और उत्पादन से सीधा जुड़ाव न होने के कारण कौशल विकास भी नहीं हो पाता और मजदूर मजदूर ही बना रह जाता है।
इसके विपरीत भाजपा ‘जी राम जी विकसित भारत ग्राम अभियान’ को गांवों के स्थायी और समग्र विकास का मॉडल बता रही है। इस बिल के माध्यम से गांवों में सड़क, पानी, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। खेती, पशुपालन, डेयरी, स्वयं सहायता समूह और स्वरोजगार को बढ़ावा देकर सिर्फ मजदूरी नहीं, बल्कि आय के नए और स्थायी साधन उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
पार्टी का दावा है कि यह बिल तकनीक आधारित निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए भ्रष्टाचार पर सख्ती करेगा और लाभ सीधे लाभार्थी तक पहुंचेगा। साथ ही युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, महिलाओं को स्वावलंबन और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना इस योजना का अहम हिस्सा है। भाजपा इसे प्रधानमंत्री के उस विज़न से जोड़ रही है, जिसमें हर गरीब का सशक्तिकरण और हर गांव का विकास करते हुए 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की बात कही गई है।
यह अभियान एक व्यापक जन-संपर्क आंदोलन के रूप में संचालित होगा। इसके अंतर्गत प्रदेश और जिला स्तर पर कार्यशालाएं, प्रेस वार्ताएं, जिला सम्मेलन, किसान और मजदूर सम्मेलन, गांव-गांव चौपालें, ट्रैक्टर रैलियां, किसान पदयात्राएं और बैलगाड़ी यात्राएं आयोजित की जाएंगी।
अभियान के प्रभावी संचालन के लिए भाजपा ने 5 सदस्यीय केंद्रीय समन्वयक टीम गठित की है, जिसमें राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद राजकुमार चाहर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा, राष्ट्रीय सचिव ओपी धनखड़, और किसान मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री शंभू कुमार शामिल हैं।
प्रदेश और जिला मुख्यालयों पर होने वाले सम्मेलनों में जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक पंचायत सदस्य, सरपंच, पंचायत चुनाव लड़े प्रत्याशी, सांसद, विधायक, एमएलसी और सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग लेंगे। वहीं ब्लॉक और मंडल स्तर पर ग्राम पंचायत सदस्यों और सहकारी संस्थाओं के अध्यक्षों के साथ संवाद होगा। ग्राम पंचायत स्तर पर घर-घर संपर्क अभियान, किसान एवं कृषि श्रमिक चौपालों के माध्यम से VB-GRAMG अधिनियम के लाभों को सरल भाषा में समझाया जाएगा, साथ ही भ्रम और अफवाहों का प्रभावी खंडन किया जाएगा।
भाजपा का दावा है कि इस जन-जागरण अभियान में एनडीए शासित राज्यों के कृषि मंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री, सांसद से लेकर पंचायत स्तर तक सभी जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पार्टी का मानना है कि यह अभियान किसानों, कृषि श्रमिकों और ग्रामीण भारत को विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।