नाटो प्रमुख की धमकी पर भारत ने कहा, हमें पता है हमारी प्राथमिकता
विदेश मंत्रालय ने नाटो प्रमुख की रूस से व्यापारिक संबंध रखने पर भारत को 'द्वितीय प्रतिबंधों' की धमकी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में 'दोहरा मापदंड' नहीं चलेगा।
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को नाटो प्रमुख की धमकी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। नाटो चीफ ने रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखने पर भारत पर संभावित 'द्वितीय प्रतिबंधों' की धमकी दी थी। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में 'दोहरा मापदंड' नहीं चलेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि हमने इस बारे में खबरें देखी हैं और हम इस पर ध्यान रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे लोगों के लिए ऊर्जा की जरूरतें पूरी करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यह बात समझने वाली है।
जायसवाल ने 'दोहरे मापदंड' के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि हम बाजारों में उपलब्ध चीजों और वैश्विक परिस्थितियों को देखकर ही फैसले लेते हैं। उन्होंने कहा कि हमें इस मामले में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड से बचना चाहिए। विदेश मंत्रालय की यह टिप्पणी नाटो प्रमुख मार्क रुटे के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने अमेरिका के सीनेटरों टॉम टिलिस और जीन शाहीन के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत, चीन और ब्राजील से रूस के साथ अपने आर्थिक संबंधों पर फिर से विचार करने को कहा था। रुटे ने कहा था कि अगर रूस शांति वार्ता के लिए तैयार नहीं होता है, तो उन्हें '100 प्रतिशत सेकेंडरी सैंक्शनंस का सामना करना पड़ सकता है।
रुटे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख को दोहराया था। ट्रंप ने पहले ही रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भारी टैक्स लगाने की धमकी दी थी। रुटे ने कहा, 'मैं इन तीनों देशों से कहना चाहता हूं, खासकर बीजिंग या दिल्ली में रहने वालों से, या ब्राजील के राष्ट्रपति से, कि वे इस पर ध्यान दें, क्योंकि इससे उन्हें बहुत नुकसान हो सकता है।' उन्होंने इन देशों से रूस पर बातचीत के लिए दबाव डालने की अपील की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'कृपया व्लादिमीर पुतिन को फोन करें और उनसे कहें कि वे शांति वार्ता को लेकर गंभीर हों, नहीं तो इसका बुरा असर ब्राजील, भारत और चीन पर पड़ेगा।'
यह बयान ट्रंप की यूक्रेन को अतिरिक्त सैन्य सहायता देने की घोषणा के बाद आया है। इस सहायता में हवाई सुरक्षा प्रणाली, मिसाइलें और गोला-बारूद शामिल हैं, जिसका ज्यादातर खर्च यूरोपीय सहयोगी उठाएंगे। ट्रंप ने रूस को गंभीर शांति वार्ता में शामिल होने के लिए 50 दिनों की समय सीमा भी दी है, नहीं तो उसे पूरे सेकेंडरी सैंक्शनंस का सामना करना पड़ेगा।