शरद पूर्णिमा काव्य महोत्सव में बही साहित्य की अमृतधारा, कवियों ने बांधा समां

आगरा। देवनागरी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में रविवार को सिकंदरा-बोदला रोड स्थित निखिल बुक कैफे में शरद पूर्णिमा काव्य महोत्सव आयोजित किया गया। ‘हृदयंगम्-106’ के अंतर्गत आयोजित इस साहित्यिक अनुष्ठान में शहर के कवियों, कवयित्रियों और साहित्यप्रेमियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्य पाठ के माध्यम से शरद पूर्णिमा की सांस्कृतिक महत्ता, मां लक्ष्मी की आराधना और भारतीय परंपराओं के विविध रंग प्रस्तुत किए गए।

Oct 25, 2026 - 21:57
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शरद पूर्णिमा काव्य महोत्सव में बही साहित्य की अमृतधारा, कवियों ने बांधा समां
देवनागरी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था द्वारा रविवार को आयोजित शरद पूर्णिमा काव्य महोत्सव में मौजूद कविगण।

मुख्य अतिथि डॉ. अशोक बंसल अश्रु ने कहा कि शरद पूर्णिमा चांदनी के साथ साहित्य का अमृत बरसाने का पर्व है। इस अवसर पर आयोजन करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कवि सम्राट डॉ. राजेंद्र मिलन ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह प्रकृति की रक्षा की शुरुआत का संदेश देने वाला पर्व भी है।

दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. बृज बिहारी लाल बिरजू ने कहा कि भारतीय त्योहारों के आगमन और समापन पर गीत-संगीत, नृत्य और गायन के आयोजन से दैवीय अमृत वर्षा का अनुभव होता है। साहित्य और संस्कृति से जुड़े ऐसे आयोजन भारतीय परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. यशोयश ने कार्यक्रम का संचालन किया। सह संयोजिका रेनू यशोयश ने आमंत्रित अतिथियों का पटका पहनाकर स्वागत किया, जबकि समन्वयक सुधारानी सुरेंद्र ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

कवियों ने रचनाओं से बांधा समां

काव्य महोत्सव में कवि-कवयित्रियों और पत्रकारों ने मां लक्ष्मी के प्रादुर्भाव की पावन बेला तथा शरद पूर्णिमा की भावभूमि पर रचनाएं प्रस्तुत कीं। काव्य पाठ करने वालों में डॉ. यशोयश, डॉ. बृज बिहारी लाल बिरजू, प्रेम प्रसून, हरीश अग्रवाल ढपोरशंख, प्रकाश गुप्ता बेबाक, सुधारानी, सुरेंद्र बघेल, डॉ. सुकेशिनी दीक्षित, रेनू यशोयश, नीरज शर्मा, सौरभ सिंह, राजीव शर्मा निस्पृह, अशोक गोयल, बोधिसत्व कस्तूरिया, रमेश अधीर, संजय कुमार एडवोकेट और डॉ. शेषपाल शेषनाग सहित अन्य रचनाकार शामिल रहे।

कवियों की रचनाओं ने शरद पूर्णिमा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक पक्षों को स्वर दिया। आयोजन में साहित्य, संस्कृति और भारतीय पर्व-परंपराओं के प्रति अनुराग की झलक देखने को मिली।

SP_Singh AURGURU Editor