न्यू ईयर जश्न इस्लाम में हराम: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का फतवा, 31 दिसंबर–1 जनवरी को उत्सव से दूरी की अपील

बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने न्यू ईयर के जश्न को लेकर सोमवार को फतवा जारी करते हुए स्पष्ट कहा कि नए साल का जश्न मनाना इस्लाम में नाजायज और हराम है। उन्होंने तमाम मुसलमानों से अपील की कि वे 31 दिसंबर की रात और 1 जनवरी को किसी भी प्रकार का जश्न न मनाएं और इससे पूरी तरह दूरी बनाए रखें।

Dec 29, 2025 - 14:49
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न्यू ईयर जश्न इस्लाम में हराम: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का फतवा, 31 दिसंबर–1 जनवरी को उत्सव से दूरी की अपील

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि शरीयत की रोशनी में नए साल का जश्न मनाने की कोई अनुमति नहीं है। उन्होंने इसे यूरोपियन कल्चर बताते हुए कहा कि इसका इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शरीयत ने फिजूलखर्ची को सख्ती से नाजायज ठहराया है, जबकि न्यू ईयर के नाम पर होटल, क्लब, पार्टियों और सड़कों पर होने वाली गतिविधियां शरीयत के खिलाफ हैं।

उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम नौजवान लड़के-लड़कियों से अपील की कि वे सोशल मीडिया और आधुनिकता के दबाव में आकर इस तरह के आयोजनों में शामिल न हों। मौलाना रजवी ने कहा कि न्यू ईयर 2026 का जश्न मनाना भी नाजायज है और इससे बचना जरूरी है।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष ने उलेमाओं से भी अपील की कि वे सख्ती से ऐसे लोगों को समझाएं और रोकें, जो न्यू ईयर का जश्न मना रहे हैं या उसकी तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज को शरीयत के रास्ते पर चलने की सलाह देना उलेमा की जिम्मेदारी है।

मौलाना रजवी ने कहा कि मुसलमानों को अपना समय इबादत, दुआ और नेक कामों में लगाना चाहिए, न कि ऐसे जश्न में जिन्हें शरीयत ने नाजायज करार दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों को अपनी शरीयत और अपने कल्चर के अनुसार जिंदगी गुजारनी चाहिए, न कि दूसरे मजहबों और संस्कृतियों की नकल करनी चाहिए।

31 दिसंबर की रात की बुराइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि न्यू ईयर सेलिब्रेशन के नाम पर फूहड़ता, शोर-शराबा, हंगामा, नाच-गाना, डांस और बेहूदगी होती है। इसके साथ शराबखोरी और फिजूलखर्ची भी आम बात है, जबकि इस्लाम में ऐसी हर चीज की मनाही है जिसमें अनैतिकता, दिखावा और गैरजरूरी खर्च शामिल हो।

SP_Singh AURGURU Editor