अब आतंकियों के डॉक्टर-मॉड्यूल की बी-टीम पर एनआईए का शिकंजा, कई राज्यों में छापे, व्हाइट-कॉलर टेरर नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद
दिल्ली धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की तफ्तीश लगातार आगे बढ़ रही है। आतंकी मॉड्यूल के जिन डॉक्टरों को पहले मुख्य साज़िशकर्ता माना जा रहा था, अब उनके समानांतर काम कर रही बी-टीम का नेटवर्क भी एजेंसी की पकड़ में आता जा रहा है। यह नेटवर्क सीधे विस्फोट में शामिल नहीं था, लेकिन बम तैयार करने, ठिकाने उपलब्ध कराने, मेडिकल परिसरों को कवर के रूप में इस्तेमाल करने और फाइनेंशियल-लॉजिस्टिक सहायता देने जैसे बैक-एंड काम संभालता था।
डॉक्टरों और प्रोफेशनल्स का संगठित नेटवर्क
जांच में अब तक यह सामने आया है कि इस मॉड्यूल में सिर्फ दो-चार डॉक्टर नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य कई प्रोफेशनल मिलाकर कुल दो दर्जन से अधिक लोग विभिन्न भूमिकाओं में सक्रिय थे। कई संदिग्ध मेडिकल संस्थानों और क्लीनिकों का इस्तेमाल बैठकें, स्टोरेज और कम्युनिकेशन के लिए करते थे, ताकि किसी को उन पर शक न हो सके। क्लीनिक और यूनिवर्सिटी परिसरों के ‘सुरक्षित माहौल’ को आतंकी गतिविधियों के कवर की तरह इस्तेमाल किया गया।
2,900 किलो विस्फोटक सिर्फ एक हमले की प्लानिंग नहीं थी
जांच अधिकारियों ने प्रारंभ में ही 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की थी। इस भारी मात्रा से स्पष्ट है कि यह मॉड्यूल किसी एक घटना तक सीमित नहीं था। यह एक बड़े पैमाने पर तैयार किए जा रहे व्हाइट-कॉलर टेरर नेटवर्क का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य लंबे समय तक सक्रिय रहकर लगातार हमले करने की क्षमता बनाना था।
कई राज्यों में छापेमारीः बी-टीम, ओजीडब्लू और स्लिपर सेल्स पर नजर
एनआईए अब उन लोगों की तलाश में है जो मॉड्यूल की ‘बाहरी परत’ यानी बी-टीम, ओजीडब्लू (ओवर-ग्राउंड वर्कर्स) या छिपे हुए स्लिपर-सेल्स की भूमिका में काम कर रहे थे। ये लोग सीधे बम प्लांट करने में शामिल नहीं होते, लेकिन नेटवर्क के लिए संसाधन, ठिकाने, परिवहन, नकली दस्तावेज़ और फंडिंग जुटाते हैं।
इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली-एनसीआर और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी छापेमारी और पूछताछ तेज़ कर दी गई है। कई लोगों के मोबाइल डेटा, बैंक लेन-देन और डिजिटल ट्रेल की फोरेंसिक जांच की जा रही है।
जांच का नया आयामः आतंकी नेटवर्क में ‘व्हाइट-कॉलर’ एंट्री
इस मॉड्यूल ने सुरक्षा एजेंसियों को एक नई चुनौती के प्रति सावधान कर दिया है कि आतंकवाद अब सिर्फ बंदूकधारी युवकों या प्रतिबंधित संगठनों तक सीमित नहीं रहा। अब शिक्षित, पेशेवर, प्रतिष्ठित पृष्ठभूमि वाले लोग भी इसमें शामिल पाए जा रहे हैं, जो समाज में बिना शक पैदा किए आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ा सकें। यह पैटर्न न केवल सुरक्षा के लिए, बल्कि सामाजिक विश्वास और पेशेवर संस्थानों की छवि के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।
जांच से जुड़े अधिकारी मानते हैं कि यह मामला अभी अपने शुरुआती चरण में है। विस्फोटक बरामदगी और डिजिटल साक्ष्यों को देखते हुए आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।