पशुधन क्रांति की ओर ओडिशा, आईवीआरआई बनेगा नॉलेज पार्टनर, वैक्सीन से उद्यमिता तक दीर्घकालिक साझेदारी की पहल

पशुधन आधारित क्षेत्रों में आ रही जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए ओडिशा सरकार ने बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) की वैज्ञानिक विशेषज्ञता, अनुसंधान क्षमता और तकनीकी नवाचार को पशुधन क्षेत्र के समग्र विकास का आधार बनाते हुए आईवीआरआई को राज्य का नॉलेज पार्टनर बनाने का प्रस्ताव सामने आया है।

Jan 8, 2026 - 21:22
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पशुधन क्रांति की ओर ओडिशा, आईवीआरआई बनेगा नॉलेज पार्टनर, वैक्सीन से उद्यमिता तक दीर्घकालिक साझेदारी की पहल
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर में आयोजित पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन में नवीन प्रगति विषयक एक दिवसीय इंटरफेस मीटिंग में मौजूद ओडिशा के प्रमुख सचिव सुरेश कुमार वशिष्ठ, आईवीआरई के निदेशक डॊ. त्रिवेणी दत्त और अन्य अधिकारी।

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-रमेश कुमार सिंह-

बरेली। ओडिशा में पशुओं से जुड़ी प्रजनन संबंधी समस्याएं, गुणवत्तायुक्त चारे की कमी, मेटाबॉलिक डिसऑर्डर, बाह्य एवं रक्त परजीवी रोग जैसी चुनौतियां पशुधन क्षेत्र के समक्ष बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए आईवीआरआई की वैज्ञानिक विशेषज्ञता, अनुसंधान क्षमता और उन्नत तकनीक के माध्यम से पशुधन क्षेत्र का समग्र विकास संभव है।

ये विचार ओडिशा सरकार के मत्स्य एवं पशुपालन संसाधन विकास विभाग के प्रमुख सचिव सुरेश कुमार वशिष्ठ ने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर में आयोजित पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन में नवीन प्रगति विषयक एक दिवसीय इंटरफेस मीटिंग में व्यक्त किए। यह बैठक निदेशालय, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाएं, ओडिशा तथा आईवीआरआई के संयुक्त तत्वावधान में हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई, जिसमें ओडिशा के पशु चिकित्सा अधिकारी, आईवीआरआई के वैज्ञानिक, अधिकारी एवं विद्यार्थी सहित कुल 502 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

मुख्य अतिथि सुरेश कुमार वशिष्ठ, आईएएस ने आईवीआरआई को वैक्सीन विकास, गुणवत्ता मूल्यांकन (क्वालिटी असेसमेंट) तथा पशुधन आधारित क्षेत्रों में उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) को बढ़ावा देने के लिए मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी की आवश्यकता बताते हुए भविष्य में औपचारिक अनुबंध का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि आईवीआरआई की वैज्ञानिक दक्षता और तकनीकी नवाचार ओडिशा के पशुधन क्षेत्र के समग्र विकास में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने अपेक्षा जताई कि आईवीआरआई ओडिशा के पशुधन क्षेत्र में नॉलेज पार्टनर के रूप में सक्रिय भूमिका निभाएगा, जिससे पशुधन उत्पादन और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ-साथ रोजगार सृजन और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि ओडिशा एक उभरता हुआ राज्य है और पशुधन क्षेत्र राज्य के आर्थिक विकास का मजबूत आधार बन सकता है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित श्री विजय अमृता कुलांगे, निदेशक, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाएं, ओडिशा सरकार ने आईवीआरआई द्वारा की जा रही पहलों की सराहना की और विकसित ओडिशा–2036 के विजन को रेखांकित किया। उन्होंने डेयरी, पोल्ट्री, सुअर पालन, बकरी पालन और संबद्ध क्षेत्रों पर राज्य सरकार के विशेष फोकस का उल्लेख करते हुए कहा कि ये क्षेत्र किसानों के सशक्तीकरण और पशुधन विकास की रीढ़ हैं। साथ ही उन्होंने वीओटीआई (VOTI) प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीक हस्तांतरण के माध्यम से आईवीआरआई के साथ सतत समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

आईवीआरआई के निदेशक-सह-कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने संस्थान की पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन से जुड़ी अनुसंधान सुविधाओं, राष्ट्रीय सेवाओं, जैविक उत्पादों की गुणवत्ता जांच, रोग प्रकोप जांच, नस्ल संरक्षण, तकनीक हस्तांतरण और विस्तार गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आईवीआरआई को हाल ही में यूजीसी द्वारा नैक (A++) ग्रेड प्रदान किया गया है, जो शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार के क्षेत्र में संस्थान की उत्कृष्टता का प्रमाण है।

स्वागत संबोधन में डॉ. रूपसी तिवारी, संयुक्त निदेशक (शिक्षा), आईवीआरआई ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए ओडिशा राज्य के साथ चल रहे प्रशिक्षण और सहयोगात्मक कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पशु चिकित्सा अधिकारियों द्वारा अल्ट्रासोनोग्राफी, रेडियोग्राफी, पोस्टमार्टम, क्लिनिकल पैथोलॉजी, पोर्टेबल डायग्नोस्टिक्स और प्रजनन तकनीकों पर विशेष प्रशिक्षण की मांग की गई है।

बैठक के दौरान ओडिशा में प्रजनन संबंधी समस्याएं, गुणवत्तापूर्ण चारे की कमी, चयापचयी रोग, बाह्य एवं रक्त परजीवी रोग जैसी प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा हुई। साथ ही एफएमडी, एलएसडी और पॉक्स रोगों के स्ट्रेन विश्लेषण, प्रकोप मानचित्रण, वन हेल्थ दृष्टिकोण के तहत जूनोटिक निगरानी, कम लागत वाले त्वरित परीक्षण किट, जलवायु परिवर्तन का रोग संचरण पर प्रभाव, बहुवैलेंट एवं गैर-आक्रामक परजीवी वैक्सीन विकास, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस प्रबंधन और राष्ट्रीय एएमआर डेटाबेस निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया। किसानों की जरूरतों के अनुरूप फीड तकनीक, शीघ्र गर्भ और हीट पहचान किट, एआई आधारित पशु स्वास्थ्य प्रबंधन उपकरण और टेली-वेटरिनरी सेवाओं पर भी विशेष बल दिया गया।

SP_Singh AURGURU Editor