विधानसभा चुनाव के बाद ही हो महिला आरक्षण पर सर्वदलीय बैठक, विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री किरन रिजीजू को लिखा पत्र, रोडमैप पहले जारी करें
विपक्षी सांसदों ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। पत्र में विपक्षी सांसदों ने लिखा कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में विधानसभा चुनावों के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
नई दिल्ली । महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए संशोधन बिल पर विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की पहल पर विपक्षी दलों के सांसदों ने केंद्रीय मंत्री किरन रिजीजू को पत्र लिखकर कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में विधानसभा चुनावों के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
विपक्ष का कहना है कि यह बैठक मौजूदा विधानसभा चुनावों के समाप्त होने के बाद आयोजित की जानी चाहिए ताकि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे पर व्यापक और सार्थक चर्चा हो सके। 24 मार्च को भेजे गए इस पत्र में विपक्षी नेताओं ने कहा है कि सरकार यदि महिला आरक्षण कानून में किसी तरह का संशोधन लाने पर विचार कर रही है तो उससे पहले सभी दलों के साथ विस्तृत चर्चा जरूरी है।
उन्होंने यह भी मांग की कि प्रस्तावित संशोधन की पूरी जानकारी और रोडमैप पहले से साझा किया जाए, जिससे बैठक प्रभावी हो सके। इस पत्र पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, सीपीएम, आरजेडी, आम आदमी पार्टी समेत कई दलों के सांसदों के हस्ताक्षर हैं।
दरअसल, केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को लागू करने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रही है। मौजूदा कानून के तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तभी लागू होगा, जब जनगणना पूरी होने के बाद परिसीमन की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। इस शर्त के चलते कानून के लागू होने की समयसीमा फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है।
ऐसे में किरन रिजीजू ने इसे लागू करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए 16 मार्च को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर सहमति की मांग की थी। इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी सांसदों से इस मुद्दे पर मुलाकात की थी। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस बाधा को दूर करने के लिए संविधान में संशोधन का विकल्प तलाश रही है, ताकि महिलाओं को जल्द आरक्षण का लाभ दिया जा सके और जनगणना व परिसीमन का इंतजार न करना पड़े।
विपक्ष का कहना है कि इस तरह के अहम फैसले पारदर्शी तरीके से और सभी दलों की भागीदारी के साथ ही होने चाहिए। इस बीच कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटा देने की मांग भी दोहराई है।।
उनका तर्क है कि मौजूदा कानून में एससी/एसटी के लिए उप-कोटा का प्रावधान है, लेकिन ओबीसी महिलाओं को शामिल किए बिना सामाजिक न्याय का उद्देश्य अधूरा रहेगा। अब नजर इस बात पर है कि सरकार विपक्ष की इस मांग पर क्या रुख अपनाती है क्या वह प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक बुलाएगी या सीधे संशोधन का रास्ता अपनाएगी। महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और राजनीति के केंद्र में बना रहने के संकेत दे रहा है।