सऊदी अरब से पाक का रक्षा समझौता, एक पर हमले को दूसरे देश पर भी माना जाएगा

पाकिस्तान-सऊदी अरब रक्षा समझौते को भारत के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। इस समझौते के अनुसार, किसी भी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। हालांकि, इस समझौते को लेकर अभी डिटेल आना बाकी है।

Sep 19, 2025 - 20:01
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सऊदी अरब से पाक का रक्षा समझौता, एक पर हमले को दूसरे देश पर भी माना जाएगा


इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया है। इस समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान परमाणु हथियारों से लैस एकमात्र मुस्लिम देश है। सऊदी अरब भी तेल के सबसे बड़े निर्यातक देशों में एक है। ऐसे में इस समझौते को भारत और इजरायल के लिए बड़ा खतरा बताया जा रहा है। इस बीच पाकिस्तान ने सफाई देते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के रक्षा सहयोग बढ़ाने के संकल्प को दर्शाता है। उसने भारत-इजरायल का बिना नाम लिए कहा कि यह किसी भी तरह किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है।

शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता राजदूत शफकत अली खान ने कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक रक्षा समझौता पूरी तरह से रक्षात्मक है और इसका किसी अन्य देश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस दौरान उन्होंने भारत या इजरायल का नाम नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों का नेतृत्व द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह समझौता कतर पर इजरायल के हमले के बाद किया गया है, हालांकि दोनों देशों के बीच इस समझौते को लेकर बातचीत पहले से ही चल रही थी।
  
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के एक बयान में कहा गया था, "समझौते में कहा गया है कि किसी भी देश के खिलाफ किसी भी आक्रमण को दोनों के खिलाफ आक्रमण माना जाएगा।" इस समझौते पर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तान ने इसे बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर प्रस्तुत किया है। हालांकि, पाकिस्तान और सऊदी अरब पुराने रक्षा सहयोगी हैं।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे कहा कि शहबाज शरीफ की सऊदी अरब यात्रा के दौरान, आधिकारिक स्तर की वार्ताएं हुईं हैं, जिनमें दोनों देशों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच भाईचारे और सहयोग का एक अनूठा बंधन है, और पाकिस्तानी लोग दो पवित्र मस्जिदों की भूमि के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं। उन्होंने कहा कि 1960 के दशक से रक्षा सहयोग संबंधों की आधारशिला रहा है और दोनों नेता संबंधों को और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।