एसआईआर को लेकर संसद में दूसरे दिन भी भारी हंगामाः संचार साथी ऐप की अनिवार्यता के रूप में विपक्ष का दूसरा बड़ा मुद्दा मिला, संसद की कार्यवाही स्थगित हुई

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। मंगलवार को सुबह संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होते ही एसआईआर को लेकर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके साथ ही संचार साथी ऐप का मुद्दा भी आज हंगामे की वजह रहा। विपक्ष ने दोनों सदनों में जोरदार नारेबाजी करते हुए सरकार पर चुनावी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप और नागरिकों की निजी स्वतंत्रता पर हमले का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने इसे पूरी तरह आधारहीन बताते हुए कहा कि विपक्ष केवल इनका राजनीतिकरण कर रहा है। लगातार शोर-शराबे के चलते कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

Dec 2, 2025 - 13:38
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एसआईआर को लेकर संसद में दूसरे दिन भी भारी हंगामाः संचार साथी ऐप की अनिवार्यता के रूप में विपक्ष का दूसरा बड़ा मुद्दा मिला, संसद की कार्यवाही स्थगित हुई

संसद के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन एसआईआर प्रक्रिया पर तीखी बहस और हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में विपक्ष एसआईआर पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारे लगाता रहा। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सदस्य वेल में पहुंच गए और पोस्टर लहराते हुए सरकार पर चुनावी पारदर्शिता को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाने लगे।

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा में सभापति राधाकृष्णन ने सदस्यों को शांत रहने की अपील की, लेकिन शोर इतना बढ़ता गया कि कार्यवाही कुछ ही मिनट में स्थगित करनी पड़ी। दोपहर को दोबारा बैठक शुरू हुई, तो हालात जस के तस रहे, जिसके बाद सदन को दूसरी बार स्थगित करना पड़ा।

विपक्ष का कहना है कि एसआईआर के नाम पर नागरिकों की पहचान, मतदाता स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से समझौता किया जा रहा है। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया चुनावी तंत्र को प्रभावित कर सकती है और पारदर्शिता पर बड़ा खतरा है।

संचार साथी ऐप बहस का नया केंद्र बना

एसआईआर विवाद के बीच संचार साथी ऐप राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है। सरकार ने नए स्मार्टफोन में यह ऐप अनिवार्य रूप से पहले से इंस्टॉल रखने का निर्देश जारी किया है और उपयोगकर्ता इसे न तो हटाएंगे, न ही बंद कर सकेंगे।

सरकार का कहना है कि यह ऐप साइबर सुरक्षा मजबूत करने, फोन चोरी व फर्जी आईएणईआई जैसी बढ़ती घटनाओं को रोकने का वास्तविक समाधान है। उनका दावा है कि डिजिटल सुरक्षा के दौर में यह कदम सार्वजनिक हित में है।

वहीं विपक्ष और कई डिजिटल अधिकार संगठनों का कहना है कि यह ऐप नागरिकों की निजता के अधिकार पर सीधा प्रहार है। विपक्ष के नेताओं ने इसे संभावित ‘निगरानी तंत्र’ बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार व्यक्तिगत बातचीत, मोबाइल गतिविधियों और संचार पर अप्रत्यक्ष रूप से नजर रखना चाहती है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस ऐप की अनिवार्यता लोकतांत्रिक समाज के मूल सिद्धांतों से टकराती है और नागरिकों के डिजिटल जीवन पर अनावश्यक सरकारी नियंत्रण स्थापित कर सकती है।

सरकार का पलटवार: विपक्ष भ्रम फैला रहा है

सरकार का कहना है कि विपक्ष केवल भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहता है। उनका कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया चुनावी सुधारों का हिस्सा है और इसका किसी भी तरह से मतदाता अधिकारों या चुनाव आयोग की स्वायत्तता से कोई संबंध नहीं है।

सरकार की ओर से कहा गया कि संचार साथी ऐप का उद्देश्य सिर्फ सुरक्षा, पारदर्शिता और धोखाधड़ी रोकना है, जबकि विपक्ष इसे जासूसी अभियान के रूप में पेश कर लोगों में गलत धारणा पैदा कर रहा है।

सरकार का तर्क है कि डिजिटल युग में सुरक्षा और गोपनीयता के बीच संतुलन ज़रूरी है और यह ऐप उसी दिशा में लिया गया कदम है।

SP_Singh AURGURU Editor