मौलाना तौकीर रजा को पुलिस ने घर से ही नहीं निकलने दिया, गिरफ्तारी देने वाले थे
बरेली। मुसलमानों पर कथित अत्याचार के खिलाफ गिरफ्तारी देने निकले मौलाना तौकीर रजा खां को रविवार को घर से बाहर निकलने ही नहीं दिया गया। उनके ऐलान के अनुसार, वह अपने 11 समर्थकों के साथ दोपहर एक बजे कलेक्ट्रेट जाकर गिरफ्तारी देना चाहते थे, लेकिन सुबह से ही उनके आवास पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती कर दी गई थी। जैसे ही मौलाना बाहर आए, पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिससे बहस और कहासुनी शुरू हो गई।
मौलाना के आवास के बाहर कई थानों की फोर्स, पीएसी और आरएएफ के जवानों को तैनात किया गया था। आला हजरत मार्ग से लेकर आसपास के संवेदनशील इलाकों में भी भारी पुलिस बल मौजूद रहा। अधिकारियों ने साफ किया कि यह कदम शहर की कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
मौलाना ने कहा कि मैंने साफ कहा था कि केवल 11 लोग गिरफ्तारी देंगे, कोई जुलूस नहीं होगा। लेकिन सरकार ने दहशत फैलाने के लिए मेरे घर को छावनी में तब्दील कर दिया। उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह सब संविधान के खिलाफ और मुसलमानों को दबाने की रणनीति का हिस्सा है।
मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि सरकार बजरंग दल जैसे संगठनों को संरक्षण देती है, जबकि मस्जिदों, मदारिस पर बुलडोजर चलाए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि बरेली में एक बच्चे की मौत के बाद डेढ़ सौ लोगों को जेल में डाल दिया गया और पूरी बस्ती को उजाड़ दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह न्याय है? पुलिस अंग्रेजों के दौर का मैनुअल आज भी लागू कर रही है, जबकि देशभक्त मुसलमानों पर लाठियां और गोलियां चलाई जा रही हैं।
उन्होंने इस आंदोलन को नई क्रांति की शुरुआत करार देते हुए कहा, आज 11 लोग गिरफ्तारी देंगे, कल 72, फिर 313 और फिर 917... यह सिलसिला पूरे देश में चलेगा। उन्होंने सभी देशप्रेमियों, हिंदू-मुस्लिम सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस मुहिम से जुड़ें क्योंकि यह संविधान की रक्षा की लड़ाई है।
एसपी सिटी मानुष पारीक ने कहा, शहर की कानून-व्यवस्था सामान्य बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। कुछ वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौलाना और उनके सहयोगियों से वार्ता कर मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की कोशिश करते रहे।