जनसुराज में बड़े बदलाव की तैयारी, पंचायत स्तर से संगठन खड़ा करेंगे पीके
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों से सबक लेते हुए प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी 'जनसुराज' के ढांचे में आमूल-चूल बदलाव की तैयारी कर ली है। चुनाव में मिली हार के तुरंत बाद सभी कमेटियों को भंग करना हार स्वीकारना नहीं, बल्कि एक नए और मजबूत संगठन की नींव रखना था। अब इस विजन को धरातल पर उतारने के लिए पार्टी ने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है।
पटना। बिहार विधानसभा 2025 चुनाव में मिली हार के बाद चुनावी रणनीतिकार के रूप में आने का इशारा तो प्रशांत किशोर ने पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक की सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दे ही दी थी। यह आगामी चुनाव से तौबा कर लेने का सूचक नहीं था बल्कि संगठन के नए स्वरूप को मजबूती देने की तब नींव रख रहे थे। अब संगठन के नए स्वरूप के लिए पर्यवेक्षक का चुने जाने के बाद प्रशांत किशोर ने संगठन की आधारशिला रख दी है।
पटना स्थित शेखपुरा हाउस में हुई पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में प्रशांत किशोर ने राज्य अध्यक्ष मनोज भारती की उपस्थिति में कहा था कि भंग की गई कमेटियां नई संगठन संरचना बनने तक काम करती रहेंगी। पार्टी ने बिहार की सभी 12 संगठनात्मक डिवीजन की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है, जो अपने-अपने जिलों में नई, प्रभावी और सक्रिय इकाइयों के गठन पर काम करेंगे।
जनसुराज के नायक प्रशांत किशोर के संगठन के नए स्वरूप के रूप में पर्यवेक्षक आए हैं। अब ये पर्यवेक्षक अपने आवंटित जिला में संगठन खड़ा करने की जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे। इस बार विचार और आस्था के साथ जुड़ने वाले कार्यकर्ताओं की निर्धारित संख्या का पंचायत वार निर्धारण कर पंचायत स्तर पर संगठन को मजबूत करेंगे। इस इकाई को पहले प्रखंड स्तर पर और फिर जिला स्तर पर मजबूत करना है। जिले की इकाई गठित करने के बाद फिर प्रदेश स्तर पर संगठन की परिकल्पना को आधार दिया जाएगा।
जनसुराज के सूत्रों की माने तो तो बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले जिस संगठन को आनन-फानन में खड़ा किया उसमें एक बड़ी संख्या की दृष्टि इस पार्टी से चुनाव लड़ कर सदन पहुंचने की थी। ऐसा देखा भी गया कि चुनाव में टिकट बंटने के बाद काफी विवाद आए। इस विवाद में सबसे अधिक चर्चा में वे लोग आए जिन्हें टिकट नहीं मिला।
चुनाव बाद जनसुराज के उम्मीदवारों की जो शिकायत आई उसमें सबसे अहम शिकायत यह मिली की जिन्हें टिकट मिला सिर्फ उनकी ताकत ही चुनाव में लगी। पार्टी कैडर बहुत ज्यादा भागीदार नहीं रहे। ये दो विवाद ऐसे थे जहां पार्टी की समर्पित कार्यकर्ता का स्पष्ट अभाव दिखा। इसलिए जनसुराज की तमाम कमेटी भंग कर दी गई। अब जनसुराज को नई ऊर्जा से भरने के लिए सांगठनिक रूप से पंचायत से प्रखंड और जिला तक के संगठन को पुनः नए संकल्प के साथ खड़ा किया जाएगा। और यह जिम्मेदारी पर्यवेक्षक के लिए तय कर दी गई है।