पीवी सिंधु चीन की चेन यूफेई को हराकर पहली बार जापान ओपन के फाइनल में पहुंचीं, दो साल बाद खिताब जीतने का सुनहरा मौका
पीवी सिंधु ने चीन की चेन यूफेई को हराकर पहली बार जापान ओपन के महिला एकल फाइनल में जगह बना ली है। यह दो वर्षों में उनका पहला बड़ा फाइनल है और उन्होंने चेन के खिलाफ लगातार हार का सिलसिला भी तोड़ दिया।
टोक्यो। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने जापान ओपन सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। सिंधु पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्होंने जापान ओपन के महिला एकल वर्ग के फाइनल में जगह बनाई है। सेमीफाइनल में उन्होंने चीन की विश्व नंबर चार और टोक्यो ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता चेन यूफेई को कड़े मुकाबले में पीछे छोड़ दिया। मुकाबला उस समय समाप्त हुआ जब चेन यूफेई हैमस्ट्रिंग चोट के कारण दूसरे गेम के दौरान मैच जारी नहीं रख सकीं।
सिंधु ने पहले गेम में बेहतरीन संयम और आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए 21-19 से जीत दर्ज की। दूसरे गेम में भी वह 15-10 से आगे थीं, तभी चेन यूफेई चोट के कारण कोर्ट से बाहर हो गईं और मैच छोड़ना पड़ा। इस तरह सिंधु ने फाइनल में प्रवेश किया।
यह उपलब्धि सिंधु के लिए कई मायनों में खास है। वह पिछले दो वर्षों में पहली बार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची हैं। साथ ही उन्होंने चेन यूफेई के खिलाफ लगातार हार के सिलसिले को भी तोड़ा। इससे पहले चीनी खिलाड़ी ने सिंधु को लगातार चार मुकाबलों में हराया था।
पूरे मैच में दिखा सिंधु का आक्रामक अंदाज
मुकाबले की शुरुआत से ही सिंधु ने तेज स्मैश, सटीक ड्रॉप शॉट और मजबूत डिफेंस के दम पर दबाव बनाया। पहले गेम के मध्य तक उन्होंने बढ़त बना ली थी। हालांकि चेन यूफेई ने वापसी करते हुए स्कोर 19-19 तक पहुंचा दिया, लेकिन निर्णायक क्षणों में सिंधु ने शानदार संयम दिखाते हुए लगातार दो अंक जीतकर पहला गेम अपने नाम कर लिया।
दूसरे गेम में भी सिंधु ने शुरुआत से बढ़त बनाए रखी। उनकी गति और आक्रामक खेल के सामने चेन संघर्ष करती नजर आईं। इसी दौरान हैमस्ट्रिंग में चोट लगने के कारण चीनी खिलाड़ी ने मैच से हटने का फैसला किया।
सिंधु ने सफलता का बताया मंत्र
फाइनल में पहुंचने के बाद सिंधु ने कहा कि इस टूर्नामेंट में हर मुकाबला उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण था। उनका पूरा ध्यान हर अंक पर था और शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ जीत हासिल करने के लिए एकाग्रता सबसे बड़ा हथियार साबित हुई। उन्होंने अपने कोच और सपोर्ट स्टाफ को भी इस सफलता का श्रेय दिया।
सिंधु को क्वार्टर फाइनल में जापान की पूर्व विश्व चैंपियन नोजोमी ओकुहारा के चोट के कारण हटने से बिना खेले सेमीफाइनल में प्रवेश मिला था। इससे उन्हें अतिरिक्त आराम मिला और वह सेमीफाइनल में पूरी तरह फिट और तरोताजा नजर आईं।
खिताब जीतने का सुनहरा अवसर
जापान ओपन के फाइनल में सिंधु का सामना जापान की अकाने यामागुची और इंडोनेशिया की पुत्री कुसुमा वारदानी के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल की विजेता से होना है। यदि सिंधु खिताब जीतने में सफल रहती हैं तो यह 2022 के बाद उनका सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सुपर 750 खिताब होगा और उनके शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ जाएगी।