राजद का मेगा मंथन, भितरघात और सहयोगी दलों का असहयोग हार का कारण
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद RJD कारणों की समीक्षा कर रही है। 4 दिसंबर तक चलने वाली इस बैठक में प्रमंडलवार नेताओं से हार की रिपोर्ट ली जा रही है, जिसमें भितरघात और सहयोगी दलों का असहयोग मुख्य कारण सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि इसके बाद आरजेडी में सफाई अभियान शुरू होगा।
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल हार के कारणों को ढूंढने के लिए समीक्षा बैठकों में जुटी हुई है। ये मंथन 4 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें रोजाना प्रमंडलवार (डिवीजन अनुसार) नेताओं और प्रत्याशियों को बुलाया जा रहा है। राजद कार्यालय में गुरुवार को सारण प्रमंडल के प्रत्याशियों के साथ बैठक हुई, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल और पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बुधवार को मगध प्रमंडल के नेताओं से चर्चा की गई थी। तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होने के बावजूद, राजद ने 143 सीटों में से केवल 25 सीटें ही जीतीं। पार्टी अब हार की गहन समीक्षा कर आगे की रणनीति तय करने में लगी है।
राजद के सूत्रों के अनुसार, विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के अलग-अलग कारण सामने आ रहे हैं। कई क्षेत्रों में पार्टी के भीतर हुए भितरघात (अपनों द्वारा धोखा) को हार का मुख्य कारण माना गया है। वहीं, कुछ इलाकों में सहयोगी दलों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलना और उनका वोट राजद को ट्रांसफर नहीं होना भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है। पार्टी अब भितरघात करने वाले और चुनाव से दूरी बनाए रखने वाले नेताओं की सूची तैयार कर रही है, जिन पर जल्द ही कार्रवाई की जा सकती है।
राजद कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में प्रत्याशियों से विस्तृत रिपोर्ट ली जा रही है। गुरुवार को सारण प्रमंडल के प्रत्याशियों के साथ बैठक हुई, जबकि बुधवार को मगध प्रमंडल के नेताओं से चर्चा की गई थी। पार्टी के वरिष्ठ नेता इस कोशिश में हैं कि वे प्रत्याशियों से बात करके जमीनी हकीकत और हार की पूरी स्थिति को समझ सकें। ये गहन समीक्षा 4 दिसंबर तक प्रतिदिन जारी रहेगी ताकि भविष्य की रणनीति तय की जा सके।
विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से ही राजद के नेता तेजस्वी यादव मीडिया के सामने नहीं आए हैं। समीक्षा बैठकों के बीच वो गुरुवार को निजी कारणों से बिहार से बाहर दिल्ली चले गए। पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा और सीधे एयरपोर्ट से रवाना हो गए।