सर्वपितृ अमावस्या पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा तट पर किया तर्पण-पिंडदान, विदा हुए पितृ
ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर रविवार को सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर हजारों श्रद्धालु जुटे और अपने ज्ञात-अज्ञात पितरों के निमित्त तर्पण-पिंडदान कर आशीर्वाद की कामना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितृ पृथ्वी से विदा लेकर अपनी लोकयात्रा को आगे बढ़ते हैं। इसी के साथ पितृ पक्ष का समापन हुआ और सोमवार से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होगा।
-आरके सिंह-
ऋषिकेश। रविवार को सर्वपितृ अमावस्या पर पितृ पक्ष का समापन हो गया। त्रिवेणी घाट पर प्रातः से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हजारों लोगों ने गंगा तट पर अपने पितरों के निमित्त तर्पण-पिंडदान किया। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या पर पितरों की पूजा अनिवार्य मानी जाती है, खासकर सर्वपितृ अमावस्या उन सभी पूर्वजों के लिए है जिनका श्राद्ध किसी अन्य तिथि पर संभव नहीं हो पाता।
चित्रकूट अखंड आश्रम के आचार्य रामस्वरूप ने बताया कि पितृ पक्ष का श्राद्ध करना पूर्वजों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त करने का अवसर है। इस वर्ष श्राद्ध की तिथियां एक कम होने से यह पूरे देश के लिए शुभ रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि 21 सितंबर का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका कोई असर भारतवर्ष पर नहीं पड़ेगा।
शास्त्रों के अनुसार अमावस्या को देवताओं की पूजा वर्जित मानी जाती है, लेकिन पितरों की पूजा अनिवार्य होती है। इसी दिन आत्मा और मन का संगम माना जाता है। पूर्वजों को जल, तिल और भोजन अर्पित करने से वे संतुष्ट होकर वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
त्रिवेणी घाट पर पहुंचे मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की श्रद्धालु नीलू चौहान ने बताया कि सर्वपितृ अमावस्या को पितरों की मुक्ति का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन मातृकुल और पितृकुल दोनों पक्ष के पितरों का सामूहिक श्राद्ध किया जा सकता है। यदि किसी को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो भी इस दिन तर्पण करने से उन्हें लाभ मिलता है और उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
भौराना (शिवपुरी) के शिक्षक आर.के. सिंह और धर्मेंद्र सिंह राजावत ने बताया कि यदि परिवार में कोई साधु-संत पूर्वज भी रहा है और उनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, तो भी इस दिन उनका श्राद्ध किया जा सकता है। मान्यता है कि अमावस्या पर पितर अपने वंशजों से मिलने पृथ्वी पर आते हैं और तर्पण से संतुष्ट होकर आशीर्वाद देकर विदा होते हैं।
सोमवार से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होगा, जो इस बार दस दिनों तक चलेंगे।