खिलौने खरीदने तक के पैसे नहीं थे, फिर भी नहीं मानी हार, संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक रश्मिका मंदाना की कहानी
कर्नाटक के कूर्ग से निकलकर पैन इंडिया स्टार बनने तक रश्मिका मंदाना का सफर आसान नहीं रहा। शुरुआती दिनों में उन्हें 20 से ज्यादा ऑडिशन में रिजेक्शन झेलना पड़ा और कई बार यह सुनना पड़ा कि उनका चेहरा अभिनेत्री जैसा नहीं है। आर्थिक तंगी, असफल फिल्मों और ट्रोलिंग के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। ‘किरिक पार्टी’, ‘गीता गोविंदम’, ‘पुष्पा’ और ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों ने उन्हें देश की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।
20 ऑडिशन में रिजेक्शन, ‘एक्ट्रेस जैसा चेहरा नहीं’ सुनकर रोती थीं रश्मिका; आज हैं करोड़ों दिलों की ‘श्रीवल्ली’
मुबंई। आज रश्मिका मंदाना भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। ‘पुष्पा’, ‘एनिमल’ और ‘छावा’ जैसी फिल्मों ने उन्हें पैन इंडिया स्टार बना दिया है, लेकिन उनकी सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, असफलताएं और अनगिनत रिजेक्शन छिपे हैं। एक समय ऐसा भी था, जब उन्हें बार-बार यह कहकर ठुकरा दिया जाता था कि उनका चेहरा किसी अभिनेत्री जैसा नहीं दिखता। लगातार नाकामी के बाद वह घर लौटकर रोती थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज करोड़ों लोगों के दिलों पर राज कर रही हैं।
कूर्ग की वादियों से बॉलीवुड तक का सफर
रश्मिका मंदाना का जन्म 5 अप्रैल 1996 को कर्नाटक के कोडागु (कूर्ग) जिले के वीराजपेट में हुआ था। कोडवा परिवार से ताल्लुक रखने वाली रश्मिका का बचपन कूर्ग की खूबसूरत पहाड़ियों और कॉफी बागानों के बीच बीता। उनके पिता मदन मंदाना स्थानीय कारोबारी हैं, जबकि मां सुमन मंदाना गृहिणी हैं। उनकी छोटी बहन शिमन मंदाना से भी उनका बेहद खास रिश्ता है। हालांकि आज उनका परिवार संपन्न है, लेकिन बचपन में आर्थिक हालात बेहद कठिन थे। एक इंटरव्यू में रश्मिका ने बताया था कि उनके माता-पिता कभी-कभी उनके लिए खिलौने तक नहीं खरीद पाते थे। परिवार को किराया चुकाने और घर चलाने के लिए संघर्ष करना पड़ता था। यही वजह है कि आज भी वह मेहनत से कमाए गए पैसों की अहमियत समझती हैं।
हॉस्टल में बीता बचपन, पढ़ाई से ज्यादा था डांस का शौक
रश्मिका ने अपनी शुरुआती पढ़ाई कूर्ग पब्लिक स्कूल, गोनिकोप्पल से की। यह एक बोर्डिंग स्कूल था, इसलिए उनका अधिकांश बचपन हॉस्टल में बीता। फिल्मों और मनोरंजन की दुनिया से उनका ज्यादा परिचय नहीं था। हॉस्टल में टीवी देखने के लिए सीमित समय मिलता था और उस दौरान भी केवल समाचार, खेल या संगीत कार्यक्रम देखने की अनुमति थी। पढ़ाई में खुद को औसत मानने वाली रश्मिका स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जान थीं। उन्हें भरतनाट्यम और डांस बेहद पसंद था। वह अक्सर सोचती थीं कि आगे चलकर पिता के कारोबार में हाथ बंटाएंगी, क्योंकि उन्हें कभी नहीं लगा था कि वह फिल्मों में करियर बनाएंगी।
अंग्रेजी साहित्य, मनोविज्ञान और पत्रकारिता में डिग्री
बहुत कम लोग जानते हैं कि रश्मिका सिर्फ अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी अच्छी रही हैं। उन्होंने मैसूर इंस्टीट्यूट ऑफ कॉमर्स एंड आर्ट्स से प्री-यूनिवर्सिटी की पढ़ाई की और बाद में बेंगलुरु के एम.एस. रामैया कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स से अंग्रेजी साहित्य, मनोविज्ञान और पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की।
कॉलेज में जीता ब्यूटी कॉन्टेस्ट, यहीं से बदली जिंदगी
साल 2014 में कॉलेज के दिनों में रश्मिका ने ‘क्लीन एंड क्लियर टाइम्स फ्रेश फेस’ प्रतियोगिता जीती। इसके बाद मॉडलिंग के कई प्रस्ताव मिलने लगे। हालांकि शुरुआत में उन्होंने अभिनय के ऑफर ठुकरा दिए, क्योंकि उन्होंने कभी अभिनेत्री बनने का सपना नहीं देखा था। बाद में कॉलेज के एक प्रोफेसर ने उन्हें ऑडिशन देने के लिए प्रेरित किया। यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।
20-25 ऑडिशन, हर बार रिजेक्शन और टूटता आत्मविश्वास
रश्मिका ने अपने करियर के शुरुआती दौर में करीब 20 से 25 ऑडिशन दिए, लेकिन ज्यादातर जगहों से उन्हें निराशा हाथ लगी। कई कास्टिंग डायरेक्टर्स ने साफ कह दिया कि उनका चेहरा किसी अभिनेत्री जैसा नहीं है। लगातार मिल रही असफलताओं ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था। वह अक्सर घर लौटकर रोती थीं और सोचती थीं कि शायद फिल्म इंडस्ट्री उनके लिए नहीं बनी है। एक फिल्म ‘गालारे गेलातीरे’ के लिए उनका चयन भी हो गया था। उन्होंने महीनों ट्रेनिंग ली, लेकिन दुर्भाग्यवश फिल्म शुरू होने से पहले ही बंद हो गई। उस समय उनके माता-पिता ने भी उन्हें घर लौट आने की सलाह दी। रश्मिका ने खुद स्वीकार किया कि वह मान चुकी थीं कि शायद अभिनय उनकी मंजिल नहीं है।
‘किरिक पार्टी’ ने बदली किस्मत
जब लगभग सभी उम्मीदें खत्म हो चुकी थीं, तभी उन्हें कन्नड़ फिल्म ‘किरिक पार्टी’ का प्रस्ताव मिला। साल 2016 में रिलीज हुई यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई और रश्मिका रातों-रात स्टार बन गईं। ऋषभ शेट्टी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने उन्हें कन्नड़ सिनेमा की नई पहचान बना दिया। इसके बाद ‘अंजनी पुत्र’ और ‘चमक’ जैसी फिल्मों ने उनकी सफलता को और मजबूत किया।
तेलुगु फिल्मों से मिली असली पहचान
साल 2018 में रश्मिका ने तेलुगु फिल्म ‘चलो’ से डेब्यू किया। इसी साल विजय देवरकोंडा के साथ आई ‘गीता गोविंदम’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया। फिल्म ने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की और रश्मिका पूरे दक्षिण भारत की सुपरस्टार बन गईं। इसके बाद ‘डियर कॉमरेड’, ‘सरिलेरु नीकेवरु’, ‘भीष्म’ और ‘देवदास’ जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
‘श्रीवल्ली’ बनकर बनीं पैन इंडिया स्टार
साल 2021 में रिलीज हुई ‘पुष्पा: द राइज’ रश्मिका के करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई। फिल्म में उन्होंने ‘श्रीवल्ली’ का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। ‘सामी-सामी’ गाना और उनकी सादगी ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद रश्मिका सिर्फ दक्षिण भारत की स्टार नहीं रहीं, बल्कि पूरे देश की पसंदीदा अभिनेत्री बन गईं।
‘एनिमल’ ने हिंदी दर्शकों के बीच बढ़ाई लोकप्रियता
रश्मिका ने 2022 में अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म ‘गुडबाय’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी, लेकिन उनके अभिनय की सराहना हुई। साल 2023 में रिलीज हुई रणबीर कपूर स्टारर ‘एनिमल’ ने उनके करियर को नई उड़ान दी। फिल्म में गीतांजलि के किरदार ने उन्हें हिंदी बेल्ट में भी बेहद लोकप्रिय बना दिया।
‘नेशनल क्रश’ से लेकर ट्रोलिंग तक
रश्मिका को सोशल मीडिया पर लंबे समय से ‘नेशनल क्रश ऑफ इंडिया’ कहा जाता है। उनकी मुस्कान, सादगी और सहज अंदाज ने उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया। हालांकि सफलता के साथ विवाद भी जुड़े। साल 2018 में अभिनेता रक्षित शेट्टी के साथ सगाई टूटने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया गया। बाद में ‘किरिक पार्टी’ और ‘कांतारा’ को लेकर दिए गए बयानों पर भी उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। लगातार ट्रोलिंग से परेशान होकर नवंबर 2022 में रश्मिका ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखी थी। उन्होंने कहा था कि लोगों को उन बातों के लिए उन्हें निशाना नहीं बनाना चाहिए, जो उन्होंने कभी कही ही नहीं।
रश्मिका की सफलता का सबसे बड़ा मंत्र
रश्मिका मंदाना मानती हैं कि रिजेक्शन और असफलताएं ही उनकी सबसे बड़ी शिक्षक रही हैं। उनके मुताबिक, सफलता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि लगातार मेहनत, धैर्य और खुद पर भरोसे से हासिल होती है। एक समय जिस लड़की से कहा गया था कि वह अभिनेत्री जैसी नहीं दिखती, वही आज भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी स्टार्स में शामिल है। रश्मिका की कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी असफलता मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।