लालू परिवार में सुलगता तनाव: बेटी रोहिणी आचार्य के तेजस्वी के करीबी पर हमले के मायने क्या हैं

पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के परिवार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की बगावत के बाद अब बेटी रोहिणी आचार्य ने भी तेजस्वी यादव के करीबी और राजद सांसद संजय यादव पर सीधे तौर पर निशाना साधा है। इस मामले के सुर्खियां बनने के बाद रोहिणी आचार्य डैमेज कंट्रोल करती भी नजर आ रही हैं।

Sep 20, 2025 - 13:33
 0
लालू परिवार में सुलगता तनाव: बेटी रोहिणी आचार्य के तेजस्वी के करीबी पर हमले के मायने क्या हैं
लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य और बराबर में वह फोटो, जिसमें तेजस्वी के करीबी संजय यादव अधिकार यात्रा के रथ में फ्रंट सीट पर बैठे दिख रहे हैं।

तस्वीर से हुई विवाद की शुरुआत

बिहार में होने जा रहे विधान सभा चुनाव के मद्देनजर मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव इन दिनों बिहार अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं। इस यात्रा के दौरान की ही एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस तस्वीर में तेजस्वी के करीबी संजय यादव यात्रा रथ की फ्रंट सीट पर बैठे नजर आए। परंपरा के अनुसार यह सीट हमेशा शीर्ष नेतृत्व- जैसे लालू प्रसाद यादव या पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले तेजस्वी यादव के लिए ही सुरक्षित मानी जाती है। इस तस्वीर ने भीतर ही भीतर पनपते तनाव को सार्वजनिक कर दिया।

रोहिणी आचार्य का तीखा हमला

लालू की वही बेटी रोहिणी आचार्य, जिन्होंने अपने पिता को किडनी दान देकर उन्हें नया जीवन दिया, इस बार परिवार और पार्टी के भीतर उठे विवाद की मुखर आवाज बन गईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखते हुए साफ कहा कि फ्रंट सीट  हमेशा शीर्ष नेतृत्व के लिए होती है। अगर कोई खुद को उससे ऊपर मानता है, तो यह विषय अलग है।

इसके साथ ही उन्होंने एक भावनात्मक अंदाज में अपनी तस्वीर स्ट्रेचर के साथ भी साझा की और लिखा कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान सबसे ऊपर है। रोहिणी ने कहा कि जो लोग वास्तव में कुर्बानी देते हैं, उनके रक्त में बेखौफी, बेबाकी और खुद्दारी बहती है।

यह अंदरूनी खींचतान के संकेत

मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस पूरे प्रकरण के बाद रोहिणी ने डैमेज कंट्रोल की भी कोशिश की, ताकि विवाद और न बढ़े। लेकिन इससे इतना जरूर स्पष्ट हो गया कि राजद के भीतर खेमेबंदी और खींचतान तेज होती जा रही है।

लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव पहले ही परिवार और पार्टी की मुख्यधारा से अलग-थलग हो चुके हैं। अब रोहिणी की सक्रियता और उनका यह खुला विरोध साफ संकेत देता है कि लालू परिवार के भीतर शक्ति संतुलन और वफादारियों पर गहरी दरारें उभर आई हैं।

इस विवाद के राजनीतिक मायने

विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक सीट को लेकर नहीं है, बल्कि नेतृत्व की स्वीकार्यता और वफादारी के सवाल से जुड़ा हुआ है। संजय यादव लंबे समय से तेजस्वी के सबसे करीबी सलाहकार और रणनीतिकार माने जाते हैं। ऐसे में रोहिणी का उन पर सीधा हमला कहीं न कहीं तेजस्वी की कार्यशैली और उनके इनर सर्कल पर प्रश्न खड़ा करता है।

SP_Singh AURGURU Editor