एसटीएफ कार्रवाई का असर, शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण दो माह से ठप, 700 से अधिक फाइलें लंबित

एसटीएफ की कार्रवाई के बाद आयुध कार्यालय में शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है। दो माह से अधिक समय में 700 से ज्यादा आवेदन लंबित हैं। फाइलों के गायब होने, कर्मचारियों में डर और एसटीएफ को मांगी गई डिटेल्स न मिलने से हालात और गंभीर हो गए हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है।

Feb 7, 2026 - 13:31
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एसटीएफ कार्रवाई का असर, शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण दो माह से ठप, 700 से अधिक फाइलें लंबित
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आगरा। जिले में शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया बीते दो माह से लगभग ठप पड़ी हुई है। आयुध कार्यालय में इस समय 700 से अधिक नवीनीकरण आवेदन लंबित हैं, जबकि प्रतिदिन करीब 50 नए आवेदन सिस्टम पर दर्ज हो रहे हैं। बढ़ते दबाव और प्रशासनिक सुस्ती के चलते लाइसेंसधारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

नवीनीकरण न होने से जहां लाइसेंसधारियों की वैधानिक स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता गहराती जा रही है। कई लाइसेंसधारी महीनों से कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा।

सूत्रों के अनुसार, गत वर्ष हुई एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई के बाद से आयुध कार्यालय में हड़कंप मचा हुआ है। अवैध असलहा और संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस प्रकरणों की जांच के दौरान एसटीएफ ने कई अहम फाइलों और रिकॉर्ड की डिटेल्स मांगी थीं। इसके बाद से नवीनीकरण प्रक्रिया की रफ्तार अचानक बेहद धीमी हो गई।

कार्यालय के कर्मचारियों पर मुकदमे दर्ज होने के बाद स्टाफ में भय और असमंजस का माहौल है। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के डर से फाइलों को आगे बढ़ाने में अधिकारी और कर्मचारी दोनों ही हिचकिचा रहे हैं।

इस बीच आयुध कार्यालय से फाइलें और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड गायब होने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। सूत्र बताते हैं कि एसटीएफ ने जैद की पत्नी, एक बिल्डर, एक शिक्षाविद और धर्मांतरण के आरोपी से जुड़े शस्त्र लाइसेंस प्रकरणों की फाइलें मांगी थीं, लेकिन कई बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद एसटीएफ को अब तक पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।

प्रशासनिक स्तर पर यह स्थिति न केवल कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी मानी जा रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो लंबित मामलों की संख्या और बढ़ सकती है।