नेपाल को मिली पहली महिला प्रधानमंत्री : सुशीला कार्की आज रात संभालने जा रहीं सत्ता की बागडोर
काठमांडू। नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ आया है। देश को पहली बार महिला प्रधानमंत्री के रूप में सुशीला कार्की मिली हैं। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने उन्हें अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाने का ऐलान किया है। आज ही रात नौ बजे वे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रही हैं। कार्की के नाम पर सर्वसम्मति बन जाने के बाद अब उनसे देश को स्थिरता और पारदर्शिता की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
बालेन शाह और Gen-Z समर्थकों का समर्थन
नेपाल में लंबे समय से चल रहे प्रदर्शन के बीच कार्की का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरा। काठमांडू के मेयर और प्रधानमंत्री पद के दावेदार बालेन शाह ने भी उनके नाम का समर्थन किया। “Gen-Z” समर्थकों ने भी भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके न्यायिक फैसलों और बेदाग छवि को देखते हुए उन्हें अंतरिम सरकार का चेहरा चुना।
कुलमान घिसिंग भी थे रेस में
अंतरिम प्रधानमंत्री पद की दौड़ में नेपाल बिजली बोर्ड के पूर्व प्रमुख कुलमान घिसिंग का नाम भी शामिल था। हालांकि, भ्रष्टाचार विरोधी कड़े फैसलों और जनता के बीच लोकप्रियता के कारण सुशीला कार्की को व्यापक समर्थन मिल गया।
भ्रष्टाचार विरोधी चेहरा
सुशीला कार्की नेपाल की न्यायपालिका में अपनी सख्त और पारदर्शी छवि के लिए जानी जाती हैं। मुख्य न्यायाधीश रहते हुए उन्होंने नेपाल सरकार की नीतियों और भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों में साहसिक फैसले सुनाए। यही वजह रही कि असमय न्यायपालिका से हटाए जाने के बावजूद जनता और खासकर युवाओं में उनकी पकड़ मजबूत रही।
विवादों से भी रहा नाता
11 जुलाई 2016 को सुशीला कार्की नेपाल सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस बनीं। लगभग एक साल तक इस पद पर रहीं। 30 अप्रैल 2017 को उन पर महाभियोग प्रस्ताव लाया गया और उन्हें निलंबित कर दिया गया। हालांकि, संसद में बहुमत न मिलने से यह प्रस्ताव पास नहीं हो सका, लेकिन इस घटनाक्रम ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा चेहरा बना दिया।
शिक्षा और शुरुआती जीवन
73 वर्षीय सुशीला कार्की का जन्म 7 जून 1952 को बिराटनगर (नेपाल) में हुआ। वह अपने माता-पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी हैं। 1972 में महेंद्र मोरांग कैंपस, बिराटनगर से ग्रेजुएशन किया। 1975 में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (भारत) से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स की डिग्री ली। 1978 में त्रिभुवन यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री और 1979 में लॉ प्रैक्टिस की शुरुआत की।
अपने बीएचयू के दिनों को याद करते हुए कार्की ने कहा था कि उन्हें वहां के शिक्षक, मित्र और गंगा नदी बेहद याद हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी की रातों में वे गंगा किनारे हॉस्टल की छत पर सोया करते थे।
भारत के साथ आत्मीय रिश्ता
सुशीला कार्की का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक व आत्मीय रिश्ते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में उनकी अच्छी राय है और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मज़बूत बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि उनका जन्मस्थान बिराटनगर भारत की सीमा से महज़ 25 मील की दूरी पर है और वे अक्सर सीमा पर स्थित बाज़ार जाती रही हैं। उन्होंने कहा था कि भारत और नेपाल की जनता के बीच गहरी आत्मीयता है। हमारे कई रिश्तेदार, परिचित और भाई-बहन भारत में रहते हैं। यह रिश्ता प्रेम और सद्भाव का है।
नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर सुशीला कार्की के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक अस्थिरता को खत्म कर नए आम चुनाव की तैयारी करना होगा। युवा-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों की उम्मीद है कि वह पारदर्शिता, भ्रष्टाचार विरोध और लोकतंत्र की मजबूती के साथ देश को नई दिशा देंगी।