खुल गये मां गंगा-यमुना के द्वार, चारधाम यात्रा का हो गया शुभारंभ

गंगोत्री/यमुनोत्री। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर उत्तराखंड में स्थित चार धामों में से दो धाम गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसी के साथ आधिकारिक रूप से वर्ष 2025 की चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया। उत्तराखंड की पर्वतीय वादियों में स्थित ये धाम श्रद्धालुओं की आस्था और आध्यात्मिक यात्रा का केन्द्र हैं।

Apr 30, 2025 - 13:23
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खुल गये मां गंगा-यमुना के द्वार, चारधाम यात्रा का हो गया शुभारंभ
उत्तराखंड में बुधवार को अक्षय तृतीया के मौके पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के मौके पर पूजा अर्चना करते उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

-अक्षय तृतीया पर आस्था के संग खुले गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट, दो मई को केदारनाथ और 4 मई को बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे

 

मुखबा से गंगोत्री पहुंची मां गंगा की डोली

मां गंगा की उत्सव डोली अपने शीतकालीन निवास मुखबा गांव से गंगोत्री धाम पहुंची। यहां सैन्य बैंड की दिव्य धुनों के बीच विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस पावन अवसर को और भी दिव्य बनाने के लिए हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा की गई। मां गंगा के जयकारों से हिमालय की घाटियां गूंज उठीं।

यमुनोत्री में भी खुले कपाट, गूंजे जय यमुना मैया के नारे

गंगोत्री के बाद मां यमुना की डोली अपने शीतकालीन गंतव्य खरसाली से यमुनोत्री धाम पहुंची। पूजा-पाठ और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यमुनोत्री के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस अवसर पर भक्तों की बड़ी संख्या धाम में मौजूदगी रही और जय यमुना मैया के नारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।

चारधाम यात्रा मोक्ष की राह

चारधाम यात्रा भारतीय सनातन परंपरा में मोक्ष की राह मानी जाती है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री, ये चारों धाम उत्तराखंड की कठिन पर्वत श्रृंखलाओं में स्थित हैं और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन हेतु पहुंचते हैं। माना जाता है कि इन चार धामों की यात्रा से जीवन के पाप कटते हैं और आत्मा को शांति मिलती है। अब दो मई को केदारनाथ और चार मई को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा अपने पूर्ण रूप में शुरू होगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रहे मौजूद

इस पावन अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं गंगोत्री और यमुनोत्री धाम पहुंचे और विधिवत पूजा अर्चना की। उन्होंने चारधाम यात्रा के सफल, सुरक्षित और व्यवस्थित संचालन के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी दिए और श्रद्धालुओं का स्वागत किया।

आस्था, परंपरा और प्रकृति का मिलन स्थल

चारधाम यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, यह आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम है। हिमालय की गोद में बसे ये धाम श्रद्धालुओं को न केवल भक्ति से जोड़ते हैं, बल्कि उन्हें प्रकृति और अध्यात्म के बीच संतुलन का संदेश भी देते हैं।

SP_Singh AURGURU Editor