यूएस सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर ट्रंप टैरिफ, आज का फैसला हिला सकता है वैश्विक कारोबार
अमेरिका की सर्वोच्च न्यायपालिका आज एक ऐसे मामले पर निर्णय देने जा रही है, जिसका असर केवल वॉशिंगटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर के व्यापार, निवेश और बाजारों की दिशा तय कर सकता है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में लगाए गए आयात शुल्क यानी टैरिफ की वैधता को लेकर सुनवाई पूरी हो चुकी है और आज इस पर अहम फैसला आने की संभावना है।
ट्रंप प्रशासन ने अपने कार्यकाल के दौरान इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का हवाला देते हुए कई देशों से आने वाले सामान पर भारी कस्टम ड्यूटी लगाई थी। इन टैरिफ का तर्क राष्ट्रीय आपात स्थिति, बढ़ता व्यापार घाटा और अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों को बताया गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि क्या राष्ट्रपति को IEEPA के तहत इस तरह व्यापक स्तर पर टैरिफ लगाने का अधिकार था या यह अधिकार क्षेत्र से बाहर का फैसला था।
अगर टैरिफ अवैध ठहरे तो क्या होगा
यदि अदालत ट्रंप के समय लगाए गए टैरिफ को असंवैधानिक या अवैध घोषित करती है, तो अमेरिकी सरकार के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार पहले से वसूले गए आयात शुल्क की भारी-भरकम राशि लौटाने की मांग उठ सकती है, जिसका आंकड़ा करीब 150 अरब डॉलर तक आंका जा रहा है।
ऐसी स्थिति में आयातक कंपनियां, व्यापारिक संगठन और कस्टम एजेंसियां रिफंड के लिए कानूनी लड़ाई तेज कर सकती हैं। साथ ही कई देश अपनी व्यापार नीति और अमेरिका के साथ समझौतों की दोबारा समीक्षा कर सकते हैं।
अगर ट्रंप के पक्ष में आया फैसला
अगर सुप्रीम कोर्ट यह मानता है कि ट्रंप प्रशासन ने कानून के दायरे में रहते हुए टैरिफ लगाए थे, तो मौजूदा शुल्क व्यवस्था बनी रहेगी। इससे अमेरिकी खजाने को राजस्व मिलता रहेगा और कुछ घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से राहत मिलती रहेगी।
हालांकि, इस स्थिति में भी वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और व्यापार युद्ध जैसे हालात बने रहने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
बाजार और कंपनियों की नजरें फैसले पर
फैसले से पहले ही एशियाई और यूरोपीय शेयर बाजारों में हलचल देखी जा रही है। निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। खासतौर पर निर्यात आधारित कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, क्योंकि टैरिफ हटने या बने रहने से उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा।
कानूनी और संवैधानिक मायने
यह मामला केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस फैसले से राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों, कांग्रेस की भूमिका और सत्ता संतुलन पर भी नई बहस छिड़ सकती है। यदि अदालत ने टैरिफ लगाने की शक्ति पर रोक लगाई, तो भविष्य में किसी भी राष्ट्रपति के लिए इस तरह के फैसले लेना आसान नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज आ सकता है, लेकिन यह संक्षिप्त आदेश होगा या विस्तृत व्याख्या के साथ, यह बाद में साफ होगा। फैसला चाहे जो भी हो, इतना तय है कि इसके बाद वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बड़े बदलावों की शुरुआत हो सकती है।