सुल्तानगंज से कालिंदी विहार तक लॉन्चर से बिछेंगे यू-गर्डर, मेट्रो अपना रहा नई तकनीक

आगरा मेट्रो के सुल्तानगंज क्रॉसिंग के आगे यू-गर्डर का परिनिर्माण अब लॉन्चर तकनीक से किया जाएगा। सुल्तानगंज की पुलिया के पास विशाल गैंट्री क्रेन लगाने का काम शुरू हो गया है। पहले चरण में सुल्तानगंज क्रॉसिंग से वाटरवर्क्स तक और आगे रामबाग स्टेशन के बाद कालिंदी विहार तक लॉन्चर तकनीक का इस्तेमाल होगा। यमुना पुल और रामबाग स्टेशन के हिस्से में पारंपरिक क्रेन से निर्माण किया जाएगा। सीमित जगह और यातायात दबाव को देखते हुए लॉन्चर तकनीक अपनाई जा रही है।

Sep 23, 2026 - 18:28
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सुल्तानगंज से कालिंदी विहार तक लॉन्चर से बिछेंगे यू-गर्डर, मेट्रो अपना रहा  नई तकनीक
सुल्तानगंज क्रासिंग पर चल रहा मेट्रो का कार्य।

सुल्तानगंज की पुलिया के पास विशाल गैंट्री क्रेन लगाने का काम शुरू, ट्रैफिक और स्थानीय आवागमन में भी मिलेगी राहत

आगरा। आगरा मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे कॉरिडोर के निर्माण कार्य को गति देने के लिए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) अब ऐसी जगहों पर आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, जहां पारंपरिक क्रेन से यू-गर्डर रखने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। सुल्तानगंज क्रॉसिंग मेट्रो स्टेशन के आगे यू-गर्डर के परिनिर्माण के लिए लॉन्चर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए सुल्तानगंज की पुलिया के नजदीक विशाल गैंट्री क्रेन इंस्टॉलेशन का काम शुरू हो गया है। इधर, सुल्तानगंज क्रॉसिंग मेट्रो स्टेशन का निर्माण भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्टेशन का कॉन्कोर्स अब आकार लेने लगा है। स्टेशन के निर्माण के साथ ही इसके आगे के हिस्से में वायाडक्ट निर्माण के लिए यू-गर्डर लॉन्च करने की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।

सुल्तानगंज की पुलिया के पास होगी यू-गर्डर की स्टॉकिंग

लॉन्चर तकनीक के तहत सबसे पहले सुल्तानगंज की पुलिया के आसपास यू-गर्डर की स्टॉकिंग की जाएगी। यहां रखे गए यू-गर्डरों को विशाल गैंट्री क्रेन की मदद से उठाकर लॉन्चर मशीन पर रखा जाएगा। इसके बाद लॉन्चर का अगला हिस्सा अगले पिलर तक पहुंचाया जाएगा। लॉन्चर मशीन यू-गर्डर को निर्धारित स्थान तक ले जाकर पिलरों के बीच स्थापित करेगी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सड़क पर भारी-भरकम पारंपरिक क्रेन खड़ी करने की जरूरत कम होगी। इससे सीमित स्थान वाले इस हिस्से में निर्माण कार्य को आगे बढ़ाना आसान होगा।

दो चरणों में होगी लॉन्चर तकनीक से यू-गर्डर की स्थापना

यूपीएमआरसी के अनुसार सुल्तानगंज क्रॉसिंग के आगे यू-गर्डर के परिनिर्माण का काम दो चरणों में लॉन्चर तकनीक से किया जाएगा। पहले चरण में सुल्तानगंज क्रॉसिंग से वाटरवर्क्स चौराहे तक लॉन्चर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस हिस्से में सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध स्थान को देखते हुए पारंपरिक क्रेन के बजाय लॉन्चर से यू-गर्डर रखने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके बाद यमुना नदी पर निर्माणाधीन पुल और रामबाग मेट्रो स्टेशन के हिस्से में यू-गर्डर का परिनिर्माण पारंपरिक क्रेन की मदद से किया जाएगा। इन स्थानों पर निर्माण की परिस्थितियां अलग होने के कारण यहां पारंपरिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। रामबाग स्टेशन के आगे फिर से लॉन्चर तकनीक का इस्तेमाल शुरू होगा। इस चरण में यू-गर्डर को कालिंदी विहार मेट्रो स्टेशन तक लॉन्चर के माध्यम से स्थापित किया जाएगा।

जगह की कमी बनी लॉन्चर तकनीक अपनाने की वजह

सुल्तानगंज क्रॉसिंग के आगे मेट्रो निर्माण के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सीमित जगह की है। इस हिस्से में पारंपरिक भारी क्रेन लगाने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सड़क पर बड़ी क्रेन खड़ी करने से यातायात प्रभावित होने और स्थानीय लोगों को परेशानी होने की संभावना रहती है। इसी को देखते हुए यूपीएमआरसी ने लॉन्चर तकनीक का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। इस तकनीक में यू-गर्डर को एक निर्धारित स्थान से उठाकर लॉन्चर के जरिए पिलरों तक पहुंचाया जाता है। इससे सड़क पर बड़े स्तर पर मशीनरी खड़ी करने की आवश्यकता कम हो जाती है।

ट्रैफिक व्यवस्था पर भी कम पड़ेगा असर

लॉन्चर तकनीक से निर्माण होने का एक बड़ा फायदा यातायात व्यवस्था को भी मिलेगा। सुल्तानगंज क्रॉसिंग और आसपास के हिस्से में पहले से ही वाहनों का दबाव रहता है। यदि यहां लंबे समय तक भारी क्रेन लगाकर निर्माण किया जाए तो यातायात प्रभावित हो सकता है। लॉन्चर के इस्तेमाल से निर्माण गतिविधियों को अपेक्षाकृत सीमित स्थान में संचालित किया जा सकेगा। इससे स्थानीय लोगों, वाहन चालकों और आसपास के कारोबारियों को भी निर्माण के दौरान कम असुविधा होने की उम्मीद है।

सुल्तानगंज क्रॉसिंग स्टेशन भी ले रहा आकार

लॉन्चर तकनीक की तैयारियों के साथ सुल्तानगंज क्रॉसिंग मेट्रो स्टेशन का निर्माण भी आगे बढ़ रहा है। स्टेशन का कॉन्कोर्स अब स्पष्ट रूप से आकार लेने लगा है। स्टेशन के ढांचे और उसके आगे के वायाडक्ट निर्माण का काम साथ-साथ आगे बढ़ने से इस कॉरिडोर में मेट्रो निर्माण की तस्वीर तेजी से बदल रही है। यूपीएमआरसी की योजना के तहत अलग-अलग हिस्सों में परिस्थितियों के अनुसार पारंपरिक क्रेन और लॉन्चर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे जहां निर्माण की गति बनाए रखने में मदद मिलेगी, वहीं व्यस्त इलाकों में यातायात और स्थानीय आवागमन को भी ध्यान में रखा जा सकेगा।