यूआईडीएआई ने की बड़ी सर्जरी: दो करोड़ मृत लोगों के आधार नंबर बंद, फर्जी लाभ की राह अब खत्म!
देश भर में आधार डेटा को साफ और अद्यतन बनाने के लिए यूआईडीएआई (UIDAI) ने बड़ी कार्रवाई की है। पहचान रिकॉर्ड्स को शुद्ध करने की प्रक्रिया के तहत करीब 2 करोड़ मृत व्यक्तियों के आधार नंबर डी-एक्टिवेट कर दिए गए हैं। कई मामलों में मृत्यु की सूचना समय पर न मिलने और आधार से जुड़े फर्जी उपयोग की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। यूआईडीएआई ने नागरिकों से अपील की है कि परिजनों की मृत्यु की सूचना तुरंत दें, ताकि आधार, बैंकिंग, पेंशन और सरकारी लाभों में पारदर्शिता बनी रहे।
नई दिल्ली। आधार डेटा में भारी मात्रा में मृत व्यक्तियों की उपस्थिति को देखते हुए यूआईडीएआई ने इस वर्ष एक बड़ा डेटा क्लीनिंग ड्राइव चलाया।
जांच में पाया गया कि कई मृत व्यक्तियों के आधार नंबर सक्रिय थे, जिनका उपयोग बैंक खातों, सरकारी सब्सिडी, पेंशन, मोबाइल सिम और अन्य सेवाओं में गलत या संदिग्ध तरीके से हो रहा था।
ऐसे की गई पहचान
यूआईडीएआई ने कई स्रोतों से डेटा मिलान किया, जिनमें रजिस्ट्रारों द्वारा भेजे गए मृत्यु प्रमाणपत्र, राज्य सरकारों के जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड, पेंशन विभाग के इनएक्टिव डेटा, बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों से संदिग्ध केवाईसी रिपोर्ट शामिल थे। इन रिकॉर्ड्स के क्रॉस-वेरिफिकेशन के बाद 2 करोड़ से अधिक आधार नंबरों को मृत व्यक्ति का रिकॉर्ड मानकर डी-एक्टिवेट कर दिया गया।
यूआईडीएआई की अपील- समय पर सूचना दें
यूआईडीएआई ने कहा कि नागरिक अपने परिवार के सदस्य की मृत्यु के बाद मृत्यु प्रमाणपत्र, पहचान दस्तावेज और स्थानीय रजिस्ट्रार की एंट्री को आधार रिकॉर्ड में अपडेट करवाएं। इससे न सिर्फ सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि स्कैम, घपला और लाभ की गलत निकासी जैसी समस्याओं पर भी रोक लगेगी।
यूआईडीएआई ने स्पष्ट किया है कि अवैध आधार, नकली डॉक्यूमेंट या किसी और के दस्तावेज़ों का दुरुपयोग करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों पर भी कार्रवाई की जाएगी।