यूनिवर्सिटी ने नहीं किया जवाब दाखिल, सीजेएम ने मुख्य सचिव को नोटिस भेज आख्या मांगी
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर मानहानि प्रकरण में अब मामला शासन तक पहुंच गया है। अधिवक्ता डॉ. अरुण कुमार दीक्षित द्वारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान शुक्रवार को कुलपति सहित किसी भी प्रतिवादी ने जवाब दाखिल नहीं किया। इस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे ‘घोर आपत्तिजनक’ करार दिया और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को आठ सितंबर को आख्या प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया है।
अधिवक्ता डॉ. अरुण कुमार दीक्षित ने दाखिल की है विवि प्रशासन के खिलाफ याचिका
डॉ. दीक्षित ने अपनी याचिका में कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कूटरचित दस्तावेज बनाकर, झूठे तथ्य प्रस्तुत कर, सुनियोजित षड्यंत्र के तहत पत्रकार वार्ता में उनके खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक बयान दिए, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा है। याचिका में कुलपति प्रोफेसर आशु रानी, कुलसचिव अजय मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश सहित कई अन्य प्रोफेसर और कार्य परिषद के सभी सदस्यों को प्रतिवादी बनाया गया है।
डॉ. दीक्षित ने बताया कि वे लंबे समय से विधि क्षेत्र में सक्रिय हैं, कई पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं और केंद्रीय व राज्य सरकार के विभिन्न पैनलों में अधिवक्ता रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय को करोड़ों रुपए का लाभ पहुंचाया, लेकिन बिलों पर 30% कमीशन मांगे जाने के आरोप के साथ जब उन्होंने इसकी शिकायत राजभवन और प्रधानमंत्री से की, तो उन्हें निशाना बनाया गया।
याचिका में प्रतिवादी बनाए गए अन्य लोगों में प्रो. राजीव वर्मा, उप कुलसचिव पवन कुमार, आईईटी के निदेशक प्रो. मनु प्रताप सिंह, प्रो. संजय चौधरी, वरिष्ठ सहायक राधिका प्रसाद और 6 जून को हुई कार्य परिषद की बैठक में शामिल सभी सदस्य शामिल हैं।
इससे पहले भी इसी प्रकरण से जुड़ी एक अन्य याचिका में जवाब न देने पर अपर मुख्य सचिव, राज्यपाल को कोर्ट द्वारा नोटिस भेजकर तलब किया जा चुका है। अब कुलपति सहित अन्य प्रतिवादियों की अनुपस्थिति और जवाब न देने की स्थिति में मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया गया है।