जॉर्डन में दो सैनिकों की मौत पर भड़का अमेरिका, ईरान पर सुबह- सुबह की एयरस्ट्राइक, कहा- हमारा मकसद आईआरजीसी को जवाब देना
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) ने बताया कि शनिवार शाम 6 बजे (ईस्टर्न टाइम) राष्ट्रपति के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू किए। इन हमलों का मकसद होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने वाली ईरानी क्षमताओं को कमजोर करना और जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने वाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की कार्रवाई का जवाब देना है।
जॉर्डन में 17 जुलाई को ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौरान दो अमेरिकी सैनिक मारे गए। वहीं, एक अन्य सैनिक अब भी लापता है। सैनिकों की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। सेना ने कहा है कि परिजनों को आधिकारिक सूचना देने के 24 घंटे बाद ही उनके नाम जारी किए जाएंगे।
अमेरिकी सेना ने बताया कि हमले के बाद चार सैनिकों को इलाज के लिए जॉर्डन के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। अब सभी चारों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। वहीं, मामूली रूप से घायल अन्य सैनिक इलाज के बाद दोबारा ड्यूटी पर लौट चुके हैं। इन घटनाओं के बाद युद्ध शुरू होने से अब तक मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या 16 हो गई है, जबकि 430 से अधिक सैनिक घायल हो चुके हैं।
इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका अपने हमले जारी रखता है तो उसे "ऐसा सबक मिलेगा जिसे वह कभी नहीं भूलेगा।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर वाले किसी भी समझौते की अब कोई वैधता नहीं रह गई है।
अमेरिकी सेना ने बताया कि शनिवार को उसने ईरान में निगरानी केंद्रों, सैन्य लॉजिस्टिक्स ढांचे, भूमिगत हथियार भंडार और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया। यह लगातार सातवीं रात है जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है।
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने कुवैत, इराक, बहरीन, जॉर्डन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। सबसे अधिक नुकसान कुवैत में हुआ, जहां एक समुद्री जल शोधन संयंत्र और एक तेल सुविधा को नुकसान पहुंचने की खबर है। इन घटनाओं के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है तथा कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं।