आसाराम की ज़मानत रद्द करने को पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई गुहार, सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
लड़की के यौन शोषण प्रकरण में सजा काट रहे आसाराम बापू को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा छह महीने की जमानत को चुनौती देते हुए पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। उनका कहना है कि जमानत के बाद परिवार लगातार भय और दबाव में जी रहा है, जिसके चलते सर्वोच्च अदालत में अपील दायर की गई है।
-राजीव शर्मा-
शाहजहांपुर। कथावाचक आसाराम बापू को अहमदाबाद उच्च न्यायालय से मिली छह महीने की अंतरिम जमानत को निरस्त कराने के लिए पीड़िता के पिता ने अब उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में याचिका दायर की है। पीड़िता के पिता का कहना है कि जमानत मिलने के बाद से परिवार डरा-सहमा हुआ है और उन्हें धमकियां मिल रही हैं।
पीड़िता के पिता के अनुसार, आसाराम किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त नहीं है और वह बीमारी का बहाना बनाकर जमानत का लाभ उठा रहा है। उन्होंने बताया कि जमानत पर बाहर आते ही आसाराम अपने अहमदाबाद आश्रम में सत्संग कर रहा है और इस दौरान अपने अनुयायियों को उनके परिवार के खिलाफ भड़काने का काम किया जा रहा है।
पीड़िता के पिता ने कहा कि इसीलिए हमने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है कि आसाराम की जमानत रद्द की जाए। पहले वह गोली मरवाने जैसी घटनाओं में लिप्त रहा है, अब लोगों को ‘जड़ मूल से खत्म’ कर रहा है। भोलानंद, राहुल सचान और सुरेशानंद इसका उदाहरण हैं, जिनका आज तक कोई पता नहीं चला।
पीड़िता के पिता का कहना है कि जब तक आसाराम जेल में रहता है तब तक वे स्वयं और परिवार को सुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन उसके बाहर होने पर उनका भय बढ़ जाता है। हालांकि, शाहजहांपुर पुलिस ने उन्हें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की है, फिर भी डर लगातार बना हुआ है।
इधर, पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेश द्विवेदी ने बताया कि पुलिस लगातार पीड़िता के परिवार के संपर्क में है। उनके आवास के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं ताकि गतिविधियों और आने-जाने वालों की निगरानी की जा सके। परिवार को एक गार्ड और दो गनर भी उपलब्ध कराए गए हैं।
एसपी ने यह भी बताया कि परिवार को निर्देश दिए गए हैं कि बाहर जाने से पहले स्थानीय पुलिस को सूचित करें और अतिरिक्त सुरक्षा के साथ ही यात्रा करें। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी अधिकारी समय-समय पर करते रहते हैं।